दिल्ली की अदालत ने ईडी मामले में अल फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष को नहीं दी अंतरिम जमानत

दिल्ली की अदालत ने ईडी मामले में अल फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष को नहीं दी अंतरिम जमानत

दिल्ली की अदालत ने ईडी मामले में अल फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष को नहीं दी अंतरिम जमानत
Modified Date: June 9, 2026 / 08:39 pm IST
Published Date: June 9, 2026 8:39 pm IST

नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को 493 करोड़ रुपये के धनशोधन मामले में आरोपी अल-फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि वह यह साबित करने में विफल रहे कि उनकी पत्नी को कैंसर के इलाज के दौरान उनके द्वारा विशेष देखभाल की जरूरत है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान सिद्दीकी की याचिका पर सुनवाई कर रही हैं। सिद्दीकी ने अपनी पत्नी की देखभाल के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी। सिद्दीकी की पत्नी चौथे चरण के ‘मेटास्टैटिक डिम्बग्रंथि कैंसर’ से ग्रस्त हैं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा,‘‘आवेदक यह साबित करने में विफल रहा है कि पत्नी लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है या वह अपनी दैनिक दिनचर्या का ध्यान रखने में असमर्थ है और उसे आरोपी/आवेदक के निरंतर सहयोग की जरूरत है और इसके अलावा, कोई अन्य वयस्क सदस्य या देखभाल करने वाला नहीं है, जिसे पत्नी की मदद के लिए उपलब्ध कराया जा सके।’’

अदालत ने कहा कि सिद्दीकी की पत्नी एक गंभीर बीमारी का इलाज करा रही हैं, लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड में उनकी हालत स्थिर बताई गई है । अदालत ने कहा कि इससे यह संकेत नहीं मिलता है कि वह लाइलाज बीमारी से ग्रस्त हैं, बिस्तर पर पड़ी हैं या अपनी दैनिक दिनचर्या को संभालने में असमर्थ हैं।

सिद्दीकी को फरवरी में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने अल-फलाह विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तार किया था और बाद में मार्च में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

ईडी के अनुसार, विश्वविद्यालय ने कथित तौर पर एनएएसी मान्यता और यूजीसी की मान्यता का झूठा दावा कर विद्यार्थियों और अभिभावकों को धोखा दिया तथा फीस वसूली के माध्यम से लगभग 493.24 करोड़ रुपये की आपराधिक आय अर्जित की।

ईडी ने आरोप लगाया कि सिद्दीकी ने अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से पैसे निकालकर उसे निजी खातों और निवेश चैनलों में लगाया और उसकी हेराफेरी के लिए कई संस्थाओं का इस्तेमाल किया।

यह विश्वविद्यालय तब भी जांच के दायरे में आ गया था जब यह पता चला कि डॉ. उमर नबी इसी संस्थान में कार्यरत था। नबी पर नवंबर 2025 में लाल किले पर हुए विस्फोट को अंजाम देने का आरोप है, जिसमें 12 लोग मारे गए थे।

भाषा राजकुमार संतोष

संतोष


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