दिल्ली की अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में दो सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए

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दिल्ली की अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में दो सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए

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  • Publish Date - May 24, 2026 / 11:39 AM IST,
    Updated On - May 24, 2026 / 11:39 AM IST

नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने कुछ मामलों में ‘‘बाहरी आर्थिक लाभ’’ के लिए जांच की निष्पक्षता से कथित तौर पर समझौता करने को लेकर एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) समेत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के दो अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और साजिश के आरोप तय करने के निर्देश दिए हैं।

विशेष न्यायाधीश अतुल कृष्ण अग्रवाल ने सीबीआई के एक निरीक्षक और एक निजी कंपनी को यह कहते हुए शनिवार को बरी कर दिया कि उनके खिलाफ सबूत पर्याप्त नहीं हैं।

सीबीआई के अनुसार, डीएसपी आर के ऋषि, निरीक्षक कपिल धनकड़ और चयन ग्रेड-दो (एसजी दो) अधिकारी समीर कुमार सिंह ने दो गैर-सरकारी व्यक्तियों और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर ‘‘बाहरी आर्थिक लाभ के लिए कुछ मामलों की जांच की निष्पक्षता से समझौता किया था’’।

एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी अधिनियम) की संबंधित धाराओं के तहत ऋषि, कपिल, समीर और मेसर्स फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।

अदालत ने कहा, ‘‘इस मामले में सीबीआई का मुख्य आरोप यह है कि आरोपी एक (ऋषि) ने अलग-अलग व्यक्तियों से रिश्वत ली और उसे आरोपी दो (कपिल) एवं आरोपी तीन (समीर) में बांटकर उनसे गैरकानूनी लाभ प्राप्त किए लेकिन इस संबंध में कोई गवाह नहीं है।’’

अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी से ऐसी कोई रकम बरामद नहीं हुई है इसलिए अभियोजन पक्ष का मामला इस संदर्भ में काफी कमजोर है।

अदालत ने कपिल और समीर के इकबालिया बयानों को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनका कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है।

समीर के खिलाफ लगे आरोपों पर अदालत ने कहा कि उन्होंने डीएसपी को सीबीआई के पास लंबित मामलों की जांच से संबंधित महत्वपूर्ण और गोपनीय जानकारी देकर उनके अवैध कृत्यों में सहायता की और बदले में डीएसपी को इसके लिए धन या अवैध रिश्वत मिलती थी। समीर द्वारा ऋषि को दी गई जानकारी में फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड भी शामिल थी।

अदालत ने कहा कि समीर के बैंक खाते में अप्रैल 2019 में कुछ ही समय में चार लाख रुपये से अधिक की नकद जमा राशि और नवंबर 2019 में लगभग 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त जमा राशि दर्ज की गई।

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, आरोपी तीन को प्राप्त और जमा की गई नकदी के स्रोत की जानकारी देनी होगी क्योंकि लोक सेवकों को आमतौर पर 20,000 रुपये से अधिक के नकद लेनदेन करने या नकद जमा करने की अनुमति नहीं होती और इस तरह के लेनदेन को हतोत्साहित किया जाता है।’’

अदालत ने समीर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग तय करने का भी आदेश दिया और कहा कि वह एक लोक सेवक हैं जिन्होंने संबंधित विभाग के प्रमुख की जानकारी के बिना कुछ दस्तावेजों तक अवैध रूप से पहुंच बनाई, जो‘‘सूचना की चोरी’’ के बराबर है।

अदालत ने ऋषि के खिलाफ भी इसी तरह के अभियोग तय करने के आदेश दिए।

अदालत ने कपिल को बरी करते हुए कहा कि धन के लेन-देन का कोई सुराग नहीं है और उनके खिलाफ मामले में ‘‘सिर्फ संदेह है लेकिन वह इतना गंभीर नहीं कि आरोप तय किए जा सकें’’।

अदालत ने फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड को भी बरी करते हुए कहा कि उसके खिलाफ आरोप केवल कुछ अनुमानों और अटकलों तथा कपिल के कथित इकबालिया बयान पर आधारित हैं, जो कानूनन मान्य नहीं है।

भाषा सुरभि सिम्मी

सिम्मी