दिल्ली उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म मामले में जमानत रद्द की, आरोपी को आत्मसमर्पण का निर्देश दिया
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म मामले में जमानत रद्द की, आरोपी को आत्मसमर्पण का निर्देश दिया
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने नगर के जनकपुरी इलाके में एक निजी स्कूल परिसर में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी 57 वर्षीय केयरटेकर को दी गई जमानत सोमवार को रद्द कर दी और उसे एक जुलाई को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति विनोद कुमार की अवकाशकालीन पीठ ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज इस मामले में आरोपी ललित कुमार को जमानत देने संबंधी निचली अदालत के सात मई के आदेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता द्वारा दायर याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, ‘‘मैं राज्य और याचिकाकर्ता (शिकायतकर्ता) की दलीलों से सहमत हूं। दोनों याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं। आरोपी ललित कुमार को एक जुलाई को दोपहर दो बजे संबंधित पॉक्सो अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाता है।’’
पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने पूर्व में दलील दी थी कि यह ऐसा मामला नहीं था, जिसमें निचली अदालत को मुख्य आरोपी यानी स्कूल के केयरटेकर को जमानत देनी चाहिए थी।
उन्होंने दलील दी थी कि यह पॉक्सो अधिनियम की धारा छह के तहत दुष्कर्म का गंभीर मामला है, जिसमें न्यूनतम 20 वर्ष के कारावास का प्रावधान है। उन्होंने कहा था कि पीड़ित बच्ची आरोपी की पहचान कर चुकी है और उसके खिलाफ आरोप लगाए हैं।
आरोपी की ओर से पेश वकील ने उसके खिलाफ लगाए गए सभी यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले के ‘‘बुनियादी तथ्य’’ ही टिकाऊ नहीं हैं और उन्हें साबित नहीं किया जा सकता।
यह घटना एक मई को सामने आई, जब बच्ची की मां ने जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि स्कूल में आरोपी ने उनकी बेटी का यौन उत्पीड़न किया।
शिकायत के अनुसार, बच्ची दाखिले के दूसरे दिन, यानी 30 अप्रैल को स्कूल गई थी। घर लौटने पर उसने दर्द की शिकायत की। मां के पूछने पर बच्ची ने घटना की जानकारी दी।
बच्ची की मां की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) (बलात्कार के लिए सज़ा) और पॉक्सो कानून की धारा 6 (यौन उत्पीड़न के लिए सजा) के तहत मामला दर्ज किया।
पुलिस ने बताया कि बच्ची ने आरोपी की पहचान की, जिसके बाद एक मई को स्कूल के केयरटेकर को गिरफ़्तार कर लिया गया। बाद में उसे अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
हालांकि, सरकारी वकील के कड़े विरोध के बावजूद द्वारका की एक अदालत ने उसे सात मई को जमानत दे दी।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश

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