लोकतंत्र उच्च शिक्षा में निवेश करता है ताकि स्नातक स्वयं को अनुशासित कर सकें : सीजेआई

लोकतंत्र उच्च शिक्षा में निवेश करता है ताकि स्नातक स्वयं को अनुशासित कर सकें : सीजेआई

लोकतंत्र उच्च शिक्षा में निवेश करता है ताकि स्नातक स्वयं को अनुशासित कर सकें : सीजेआई
Modified Date: March 14, 2026 / 08:28 pm IST
Published Date: March 14, 2026 8:28 pm IST

चंडीगढ़, 14 मार्च (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि एक लोकतंत्र उच्च शिक्षा में इसलिए निवेश नहीं करता कि उसके स्नातक केवल समृद्ध हों, बल्कि इसलिए करता है ताकि वे स्वयं को अच्छी तरह से अनुशासित कर सकें।

उन्होंने महेंद्रगढ़ स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘सार्वजनिक जीवन की हर संस्था – अदालतें, सिविल सेवाएं, स्कूल, अस्पताल, स्थानीय प्रशासन निकाय – इन सभी की गुणवत्ता उन लोगों की योग्यता पर निर्भर करती है जो इनमें सेवा करने के लिए चुने जाते हैं।’’

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि महज 17 वर्षों में, विश्वविद्यालय ने तेजी से प्रगति की है और राष्ट्रीय मान्यता एवं पहचान हासिल की है।

सीजेआई ने कार्यक्रम में मौजूद छात्रों से कहा कि उन्हें प्राप्त डिग्री उनके द्वारा अर्जित ज्ञान को प्रमाणित करती है और उन्हें इस पर गर्व होना चाहिए।

उन्होंने इसी के साथ रेखांकित किया कि ‘‘औपचारिक शिक्षा की संरचना से मुक्त होने के बाद आपका चरित्र और निर्णय क्षमता कैसी रहती है, यह आपकी डिग्री यह प्रमाणित नहीं करती, और न ही कोई भी परीक्षा इसे माप सकती है। मेरे अनुभव में, यही अंततः जीवन की दिशा निर्धारित करता है।’’

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों के ऐसे स्नातक भी हैं जो दबाव में लड़खड़ा गए, इसलिए नहीं कि उनमें ज्ञान की कमी थी, बल्कि इसलिए कि उनकी परीक्षा स्कूल या कॉलेज की परीक्षा के अलावा किसी और चीज से कभी नहीं ली गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘और फिर ऐसे पेशेवर भी हैं जो उन संस्थानों से आते हैं जिनके बारे में किसी ने नहीं सुना है, जो संयम और गंभीरता के साथ आगे बढ़ते हैं और जिस भी कमरे में प्रवेश करते हैं, वहां के सभी लोगों का विश्वास अर्जित करते हैं।’’

सीजेआई ने समारोह में मौजूद विद्यार्थियों से सवाल किया कि फिर वह विशिष्ट कारक क्या है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे विचार में, इसका कक्षा में प्रदर्शित प्रतिभा से कोई लेना-देना नहीं है और इसका लगभग सबकुछ पालन-पोषण से संबंधित है।’’

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘जो लोग अपने परिवारों को गरिमा के साथ अभावों का सामना करते हुए देखकर बड़े हुए, जिन्होंने बचपन से ही यह समझ लिया था कि दुनिया आपकी सुविधा के अनुसार नहीं बदलती और जिन्होंने पेशेवर जीवन में प्रवेश करते समय यह जान लिया था कि कड़ी मेहनत केवल एक चरण नहीं बल्कि एक स्थायी अवस्था है, वे अपने साथ कुछ ऐसा लेकर आए थे जो कोई पाठ्यक्रम नहीं सिखा सकता। वे एक ऐसी गंभीरता लेकर आए थे जो दिखावटी नहीं बल्कि वास्तविक थी।’’

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में मौजूद कई छात्र ठीक इन्हीं प्रक्रियाओं से आगे आए हैं।

सीजेआई ने कहा, ‘‘आप ऐसे घरों में पले-बढ़े हैं जहां विश्वविद्यालय की डिग्री कोई अनिवार्य योग्यता नहीं थी, बल्कि एक ऐसा लक्ष्य था जिसके लिए पूरा परिवार एकजुट होता था। आपके परिवारों द्वारा किया गया निवेश केवल इसलिए नहीं था कि आप आराम से जीवनयापन कर सकें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसे इसलिए बनाया गया था क्योंकि उनका मानना ​​था, भले ही वे इसे हमेशा स्पष्ट रूप से व्यक्त न कर सकें, कि एक शिक्षित बेटी या बेटा अपनी सीखी हुई बातों का उपयोग उससे परे कुछ निर्मित करने के लिए करेगा।’’

भाषा धीरज नेत्रपाल

नेत्रपाल


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