बाघों और वन्यजीवों पर डिजिटल पहरा, एआई से होगी जंगल की रखवाली

बाघों और वन्यजीवों पर डिजिटल पहरा, एआई से होगी जंगल की रखवाली

बाघों और वन्यजीवों पर डिजिटल पहरा, एआई से होगी जंगल की रखवाली
Modified Date: June 14, 2026 / 03:15 pm IST
Published Date: June 14, 2026 3:15 pm IST

(अविनाश बाकोलिया)

जयपुर, 14 जून (भाषा) राजस्थान के वन्यजीव अभयारण्यों में बाघों तथा अन्य वन्यजीव प्रजातियों की गतिविधियों की निगरानी और अवैध शिकार की रोकथाम के लिए वन विभाग अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली की मदद लेगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शिकार रोधी तंत्र, सॉफ्टवेयर आधारित निगरानी प्रणाली है जिसमें थर्मल और ऑप्टिकल कैमरे, ड्रोन, वायरलेस नेटवर्क, सौर ऊर्जा प्रणाली और अन्य तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।

वन विभाग के अनुसार इस परियोजना का वित्त पोषण और क्रियान्वयन सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग और ‘राजकाम्प इंफो सर्विस लिमिटेड’ द्वारा किया जा रहा है।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी. अरुण प्रसाद ने बताया कि प्रथम चरण में राज्य के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में 56 निगरानी तंत्र लगाए गए थे और पांच ड्रोन तैनात किए गए थे। इनमें रणथम्भौर बाघ अभयारण्य में 12, सरिस्का बाघ अभयारण्य में 16, मुकुंदरा हिल्स बाघ अभयारण्य में 16, जंवाई तेंदुआ अभयारण्य में चार और झालाना तेंदुआ अभयारण्य में आठ निगरानी तंत्र लगाए गए थे।

अधिकारी ने बताया कि निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए मौजूदा तंत्र को नवीनतम तकनीक से अद्यतन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत पुराने कैमरा नेटवर्क, सर्विलांस सॉफ्टवेयर, संचार उपकरणों को बेहतर बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अब द्वितीय चरण में दूसरे अभयारण्यों में आधुनिक और नई तकनीक के 15 निगरानी तंत्र लगाए जा रहे हैं। इसमें रामगढ़ विषधारी बाघ अभयारण्य में 3, जमवा रामगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में 3, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में 2, कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में 4 और टोडगढ़ रावली वन्य अभयारण्य में 3 निगरानी तंत्र लगाने का काम किया जा रहा है। अगले तीन महीने में सभी जगहों पर निगरानी तंत्र लगा दिए जाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि इनका उद्देश्य अभयारण्यों की 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था करना है। साथ ही इससे बाघों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों के बारे में पता लग सकेगा।

वन विभाग के अनुसार, कई बार बाघ या अन्य वन्यजीव वन क्षेत्र से बाहर निकलकर आवासीय क्षेत्रों में चले जाते हैं। यदि वन्यजीव जंगल से बाहर निकलेंगे तो इस निगरानी तंत्र के माध्यम से संबंधित उपवन संरक्षक और वनकर्मियों के मोबाइल पर संदेश पहुंचेगा, जिससे वे सर्तक हो जाएंगे और तुरंत स्थिति को संभाल सकेंगे।

इस प्रणाली से वन्यजीव अपराधों पर भी लगाम लग सकेगी। वन में किसी भी जगह पर यदि वन्यजीवों के शिकार की घटना होगी तब भी वन अधिकारियों को मोबाइल पर संदेश पहुंचेगा।

अधिकारियों ने बताया कि इन निगरानी तंत्र में लगाए गए ‘डुअल सेंसर कैमरा’ आठ किलोमीटर तक 360 डिग्री में जंगल में होने वाली गतिविधियों को कैद कर सकता है।

ये कैमरे बाघों की धारियों के पैटर्न के आधार पर उनकी पहचान करने और किसी भी गतिविधि का सटीक स्थान बताने में भी सक्षम होंगे।

भाषा बाकोलिया अमित शोभना

शोभना

शोभना


लेखक के बारे में