नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) कान फिल्म महोत्सव में ऐश्वर्या राय बच्चन अक्सर भारतीय सिनेमा का चेहरा बनकर रैंप पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं—कभी परंपरागत सौंदर्य की छवि के रूप में, तो कभी उसे चुनौती देती हुई।
इस बार भी पिछले महीने कान में उनकी उपस्थिति के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई कि महिलाओं पर उम्र और शरीर को लेकर दबाव क्यों बनाया जाता है। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद उनकी उपस्थिति और वजन को लेकर ट्रोलिंग और बॉडी शेमिंग की चर्चाएं शुरू हो गईं।
कान में इस साल लोरियल की ब्रांड एंबेसडर आलिया भट्ट और अदिति राव हैदरी की मौजूदगी के बीच ऐश्वर्या राय के न आने पर भी सवाल उठे, जबकि वह 24 वर्षों से इस फिल्म महोत्सव से जुड़ी रही हैं।
बाद में डिजाइनर अमित अग्रवाल के तैयार किए गए नीले गाउन में 52 वर्षीय ऐश्वर्या ने रेड कार्पेट पर कदम रखा, जिसके बाद उनकी तस्वीरें फिर चर्चा में आ गईं और बहस ने नया मोड़ ले लिया।
इस विवाद के बीच पत्रकार मृणाल पांडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्हें लेकर टिप्पणी की कि इस बार प्राकृतिक सुंदरता नदारद है। इसके बाद बहस तेज हो गई। पांडे ने बाद में अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि सेलिब्रिटीज को अलग मानकों पर आंका जाता है क्योंकि वे लंबे समय से सौंदर्य के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं।
बाद में उनकी कुछ आलोचनात्मक पोस्ट हटा दी गईं।
ऐश्वर्या को पहले भी कई बार ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा है, खासकर 2011 में बेटी आराध्या के जन्म के बाद उनके वजन को लेकर।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह आलोचना समाज के सौंदर्य संबंधी रूढ़ विचारों का परिणाम है। मनोवैज्ञानिक श्वेता शर्मा के अनुसार, समाज आज भी महिलाओं को एक स्थिर सौंदर्य मानक में देखना चाहता है, जबकि वास्तविकता में उम्र बढ़ना और शारीरिक बदलाव स्वाभाविक हैं।
उन्होंने कहा कि ऐश्वर्या को दशकों से ‘परफेक्शन’ और ‘मिस वर्ल्ड’ जैसी छवि के साथ देखा गया है, जिससे उनके हर बदलाव पर अत्यधिक प्रतिक्रिया होती है।
अभिनेत्री कंगना रनौत ने ट्रोलिंग की आलोचना करते हुए कहा कि महिलाओं को उम्र के साथ भी रेड कार्पेट पर आत्मविश्वास से दिखने का अधिकार है।
ऐश्वर्या की फिल्म ‘देवदास’ की सह-कलाकार माधुरी दीक्षित ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां युवाओं को गलत संदेश देती हैं और किसी व्यक्ति की पहचान को उसके लुक या उम्र तक सीमित करना अनुचित है।
ऐश्वर्या ने पहली बार 2002 में कान में उपस्थिति दर्ज कराई थी, जब ‘देवदास’ वहां प्रदर्शित हुई थी। इसके बाद 2003 में वह लोरियाल की ब्रांड एंबेसडर बनीं और तब से लगातार इस महोत्सव का हिस्सा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं के प्रति यह अपेक्षाएं और कठोर मानक पुरुष सितारों की तुलना में कहीं अधिक असंतुलित हैं, जहां पुरुषों को उम्र बढ़ने के बावजूद अधिक आसानी से स्वीकार किया जाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रवृत्ति मनोरंजन उद्योग में गहरी लैंगिक असमानता को भी उजागर करती है, हालांकि ओटीटी और कुछ समकालीन फिल्मों में अब धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है।
भाषा मनीषा वैभव
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