निर्माण स्थल पर बिजली आपूर्ति के संबंध में गलत जानकारी दी गई, उच्च न्यायालय में याचिका दायर
निर्माण स्थल पर बिजली आपूर्ति के संबंध में गलत जानकारी दी गई, उच्च न्यायालय में याचिका दायर
गुरुग्राम, 24 मई (भाषा) पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर एक अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के एक अधिकारी ने गुरुग्राम में एक निर्माण स्थल की बिजली आपूर्ति बंद करने के मामले में झूठे बयान और भ्रामक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस निर्माण स्थल को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा बंद करने का आदेश दिया गया था।
गुरुग्राम निवासी रामधन द्वारा दायर इस याचिका में डीएचबीवीएन के कार्यकारी अभियंता विकास यादव पर अदालत के निर्देशों का ‘‘जानबूझकर उल्लंघन’’ करने का आरोप लगाया गया है। याचिका के अनुसार, बार-बार यह दावा किया गया कि सेक्टर-27 स्थित राजदरबार आइकॉनिक वेंचर्स लिमिटेड से जुड़े निर्माण स्थल पर कोई बिजली कनेक्शन नहीं था।
याचिका के अनुसार, सीएक्यूएम ने 12 दिसंबर, 2025 को एक नोटिस जारी किया था, जिसमें निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों से संबंधित कथित उल्लंघनों के कारण निर्माण स्थल की बिजली आपूर्ति को तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया था।
यह आदेश डीएचबीवीएन और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित कई एजेंसियों को संबोधित था।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि आपूर्ति बंद करने के नोटिस के बाद, डीएचबीवीएन ने 28 जनवरी, 2026 को एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया कि बिजली प्रदान नहीं की गई थी और निरीक्षण के दौरान उस स्थान पर कोई विद्युत कनेक्शन नहीं पाया गया था।
याचिका में कहा गया है कि इसी तरह के दावे बाद में उच्च न्यायालय के समक्ष एक संक्षिप्त जवाब में और उसके बाद 18 मई, 2026 को दाखिल एक हलफनामे के माध्यम से दोहराए गए थे।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सेक्टर 27 स्थित एक परिसर के लिए क्रिसम प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर जारी बिजली बिल में जनवरी 2026 के लिए सक्रिय बिजली खपत दर्शाई गई है, जो अदालत के समक्ष डीएचबीवीएन के रुख के विपरीत है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि बिजली बिल की मौजूदगी यह साबित करती है कि आपूर्ति बंद करने के आदेश के बावजूद संबंधित परिसर में या उसके आसपास बिजली की आपूर्ति जारी थी।
भाषा आशीष सुभाष
सुभाष

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