एआई171 विमान दुर्घटना के पीड़ितों के परिवारों ने ब्लैक बॉक्स डेटा जारी करने की मांग की, प्रधानमंत्री को पत्र लिखा
एआई171 विमान दुर्घटना के पीड़ितों के परिवारों ने ब्लैक बॉक्स डेटा जारी करने की मांग की, प्रधानमंत्री को पत्र लिखा
अहमदाबाद, चार अप्रैल (भाषा) एअर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के 10 महीने बाद पीड़ितों के शोक संतप्त परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर ‘कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर’ (सीवीआर) और ‘ब्लैक बॉक्स’ का डेटा जारी करने का आग्रह किया है। इस त्रासदीपूर्ण दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हो गई थी।
एअर इंडिया की उड़ान एआई 171 (बोइंग 787-8 का विमान) लंदन जाने वाली थी। लेकिन यह विमान 12 जून, 2025 को सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ क्षण बाद ही एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
विमान में आग लग गई जिससे उसमें सवार 242 लोगों में से 241 व्यक्तियों समेत जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई।
गुजरात भर से लगभग 30 शोक संतप्त परिवार शनिवार को अहमदाबाद में एकत्रित हुए और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस त्रासदी के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए सीवीआर और ‘ब्लैक बॉक्स’ (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) का डेटा जारी करने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम जानना चाहते हैं कि दुर्घटना का कारण क्या था और क्या इसमें कोई तकनीकी खराबी थी।’’ इस पत्र की प्रतियां विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी), नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भेजी गईं।
पत्र में कहा गया है कि अगर ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम पीड़ितों के परिवारों के साथ निजी तौर पर साझा किया जाना चाहिए।
इस दुर्घटना में अपने 24 वर्षीय बेटे को खोने वाले नीलेश पुरोहित ने कहा, ‘‘मेरा घर अब पूरी तरह सूना लगता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी मुआवजा इस खालीपन को नहीं भर सकता। हमें पैसा नहीं चाहिए, हम बस यह जानना चाहते हैं कि क्या हुआ था।’’
कई लोगों के लिए संस्थागत सहायता की कमी से दर्द और भी बढ़ जाता है। वासद की किंजल पटेल, जिन्होंने अपनी मां को खो दिया, ने हाल ही में एअर इंडिया द्वारा पीड़ितों के सामान को वापस पाने में मदद के लिए बनाई गई वेबसाइट का उपयोग करने में आने वाली कठिनाई का वर्णन किया।
उन्होंने कहा, ‘‘25,000 से अधिक वस्तुएं सूचीबद्ध हैं, लेकिन तस्वीरें स्पष्ट नहीं हैं। कुछ भी ढूंढ़ना लगभग असंभव है।’’
अन्य लोगों ने सुलभ संचार माध्यमों की कमी पर चिंता व्यक्त की। अपनी मां, भाई और बेटी को खोने वाले खेड़ा निवासी रोमिन वोरा ने डिजिटल उपकरणों से अपरिचित परिवारों के सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘केवल एक ही ईमेल आईडी है और जवाब मिलने में 15 दिन तक लग जाते हैं। गांवों में बहुत से लोग ईमेल का उपयोग करना भी नहीं जानते।’’
एयरलाइन के जवाब की प्रतीक्षा है।
एएआईबी ने पिछले साल जुलाई में विमान दुर्घटना पर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। एएआईबी संभवतः त्रासदी की पहली बरसी के आसपास जून में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
भाषा संतोष प्रशांत
प्रशांत

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