‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के नजदीक सरकारी जमीन पर अधिकारियों की ओर से बनाए गए पांच ढांचे ढहाए गए
‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के नजदीक सरकारी जमीन पर अधिकारियों की ओर से बनाए गए पांच ढांचे ढहाए गए
एकता नगर, 29 जून (भाषा) गुजरात के नर्मदा जिले में अधिकारियों ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के नजदीक सरकारी अधिकारियों (सेवारत और सेवानिवृत्त) को आवंटित भूखंड पर अनधिकृत रूप से बनाई गई पांच इमारतों को ध्वस्त कर दिया। स्थानीय भाजपा विधायक ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई आवंटन की शर्तों और निर्माण नियमों का उल्लंघन करने की वजह से की गई।
विधायक के मुताबिक सरकारी जमीन आवासीय उद्देश्य से आवंटित की गई थी, लेकिन कुछ आवंटियों ने वाणिज्यिक उद्देश्य से बहुमंजिला इमारतें बना ली थीं जिनमें बड़ी संख्या में कमरे थे।
‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा जो दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है) से लगभग एक किलोमीटर दूर गरुड़ेश्वर इलाके में 2019 में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को रियायती दरों पर आवंटित 13 आवासीय भूखंड वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।
प्रशासन के मुताबिक सरकार पहले ही छह भूखंड वापस ले चुकी है, जबकि दो आवंटियों को अदालत से अंतरिम राहत मिली है। बाकी पांच ढांचों को रविवार को ध्वस्त कर दिया गया।
नंदोद की विधायक दर्शना देशमुख ने ध्वस्तीकरण के बाद कहा कि उन्होंने 2023 में भूखंड अधिकारियों को रियायती दरों पर आवंटित किए जाने की खबर अखबारों में प्रकाशित होने के बाद सबसे पहले जिला समन्वय समिति की बैठक में यह मुद्दा उठाया था।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पूछा था कि कितने अधिकारियों को ये भूखंड आवंटित किये गए हैं और किन शर्तों पर। मुझे बताया गया कि लगभग 13 सरकारी अधिकारियों को भूखंड आवंटित किये गए हैं। सरकार ने अब उन पांच निर्माणों को गिरा दिया है, जहां भूखंड आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया गया था।’’
देशमुख ने दावा किया कि स्थानीय पंचायत ने निर्माण के दौरान भी भूखंड आवंटियों को ‘लगभग तीन बार’ नोटिस जारी किए थे, लेकिन उन्होंने उनका पालन नहीं किया।
भाजपा विधायक देशमुख ने आरोप लगाया, ‘‘उन्होंने नगर योजना प्राधिकरण से इमारत निमार्ण एवं आकलन की मंजूरी नहीं ली थी। चूंकि यह इलाका ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ ज़ोन में आता है, इसलिए पाया गया कि निर्माण कार्य तय शर्तों का उल्लंघन करके किए गए थे।’’
उन्होंने कहा कि जमीन रिहायशी उद्देश्य से आवंटित की गई थी, लेकिन कुछ आवंटियों ने कई कमरों वाली बहुमंजिला इमारतें बना ली थीं।
देशमुख ने दावा किया, ‘‘ये भूखंड रिहायशी इस्तेमाल के लिए आवंटित किए गए थे। लेकिन हमें ज्ञात हुआ कि वहां 15 से 25 कमरों वाली तीन से चार मंज़िला इमारतें बनाई गई थीं। ऐसा लगता है कि वहां वाणिज्यिक निर्माण किया जा रहा था।’’
उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन होने पर किसी को भी कार्रवाई से छूट नहीं मिलनी चाहिए।
देशमुख ने कहा, ‘‘चाहे कोई अधिकारी हो, जन-प्रतिनिधि हो या कोई और, सरकार अपने निर्णय पर अडिग है। यह कार्रवाई पारदर्शिता दिखाती है और यह संदेश देती है कि नियमों का उल्लंघन करने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।’’
विधायक ने यह भी सवाल उठाया कि अधिकारियों ने तेजी से विकसित हो रहे केवड़िया-गरुड़ेश्वर इलाके में भूखंड की मांग क्यों की थी।
नर्मदा ज़िले के जिलाधिकारी गंगा सिंह और जिला विकास अधिकारी आर.वी. वाला से कई बार इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली।
भाषा धीरज संतोष
संतोष

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