वायु प्रदूषण से संबंधित याचिका का निपटारा होने से चार दशक पुराने एमसी मेहता मामले का हुआ पटाक्षेप

वायु प्रदूषण से संबंधित याचिका का निपटारा होने से चार दशक पुराने एमसी मेहता मामले का हुआ पटाक्षेप

वायु प्रदूषण से संबंधित याचिका का निपटारा होने से चार दशक पुराने एमसी मेहता मामले का हुआ पटाक्षेप
Modified Date: March 15, 2026 / 05:11 pm IST
Published Date: March 15, 2026 5:11 pm IST

नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) चार दशक पुराने एम सी मेहता मामले का आखिरकार 12 मार्च को पटाक्षेप हो गया, जब उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण से संबंधित 1985 की जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।

पर्यावरणविद् एम सी मेहता द्वारा 1985 में दायर की गई जनहित याचिका के परिणामस्वरूप दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधित करने तथा संबंधित मुद्दों के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक निर्णय और आदेश जारी किए गए।

महेश चंद्र मेहता (79) एक वकील हैं, जो वायु प्रदूषण, गंगा प्रदूषण और ताजमहल के संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रमुख पैरोकार रहे हैं।

बारह अक्टूबर, 1946 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे मेहता ने अपनी प्राथमिक शिक्षा धंगरी गांव में पूरी की और राजौरी के एक स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

बाद में मेहता जम्मू चले गए, जहां उन्होंने जम्मू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर और कानून की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की।

जम्मू में रहने के दौरान, मेहता ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

मेहता ने 1983 में दिल्ली आकर उच्चतम न्यायालय में वकालत शुरू की और 1984 में पर्यावरण संबंधी मुकदमों पर ध्यान केंद्रित किया।

पिछले कुछ वर्षों में, मेहता को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जिनमें ‘गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार’ (जिसे अमेरिका और यूरोप में नोबेल पुरस्कार के वैकल्पिक रूप में जाना जाता है), 1993 में संयुक्त राष्ट्र का ग्लोबल 500 पुरस्कार और 1997 में मैग्सायसाय पुरस्कार शामिल हैं।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप


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