मानस राष्ट्रीय उद्यान में घास नर्सरी की शुरुआत, 35 वर्षों में घासभूमि क्षेत्र करीब 60 प्रतिशत कम हुआ
मानस राष्ट्रीय उद्यान में घास नर्सरी की शुरुआत, 35 वर्षों में घासभूमि क्षेत्र करीब 60 प्रतिशत कम हुआ
गुवाहाटी, सात जून (भाषा) असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य (एमएनपीटीआर) ने रविवार को राज्य की पहली घास नर्सरी की शुरुआत की जिसका उद्देश्य संकटग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है। पिछले 35 वर्षों में इस उद्यान के घासभूमि क्षेत्र में 60 प्रतिशत से अधिक की कमी आयी है।
अधिकारियों ने इसी अवसर पर 15 ‘पिग्मी हॉग’ भी जंगल में छोड़े। ‘पिग्मी हॉग’ दुनिया का सबसे छोटा और दुर्लभ जंगली सुअर है, जिसे ‘पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम’ (पीएचसीपी) के तहत छोड़ा गया।
एमएनपीटीआर ने एक बयान में कहा, ‘‘असम के संकटग्रस्त घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़े कदम के तहत मानस राष्ट्रीय उद्यान के बांसबारी रेंज में राज्य की पहली समर्पित घास नर्सरी का उद्घाटन किया गया।’’
इसमें कहा गया है कि नर्सरी को लगभग 7.5 बीघा (करीब एक हेक्टेयर) क्षेत्र में राज्य के ‘कंपेंसेटरी अफॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी’ (कैम्पा) के वित्तीय सहयोग से विकसित किया गया है।
एमएनपीटीआर ने कहा, ‘‘यह नर्सरी घासभूमि पुनर्स्थापन और विस्तार के लिए दीर्घकालिक बीज स्रोत के रूप में कार्य करेगी, न केवल मानस बल्कि असम के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी।’’
इसमें कहा गया है कि यह पहल ऐसे समय की गई है जब हाल के आकलनों से यह बात सामने आयी कि पिछले साढ़े तीन दशकों में अभयारण्य ने अपने ऐतिहासिक घासभूमि क्षेत्र का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खो दिया है।
एमएनपीटीआर ने कहा, ‘‘1990 में लगभग 384 वर्ग किलोमीटर (परिदृश्य का 45 प्रतिशत) में फैली घासभूमि घटकर आज लगभग 155 वर्ग किलोमीटर (18 प्रतिशत) रह गई है। इसका मुख्य कारण आक्रामक प्रजातियां, वनों का अतिक्रमण, नदियों की बदलती धारा और पिछले दशकों में पर्यावास प्रबंधन में लंबे समय तक आई बाधा है।’’
इसमें कहा गया है कि अनुमान है कि हर वर्ष लगभग 6 वर्ग किलोमीटर घासभूमि नष्ट हो रही है, जिससे पुनर्स्थापन कार्यों की तात्कालिक आवश्यकता स्पष्ट होती है।
यह परियोजना मानस के उन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिनका उद्देश्य एशिया के सबसे महत्वपूर्ण नदीय घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक को पुनर्जीवित करना और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की पारिस्थितिक शुचिता को सुरक्षित रखना है।
परियोजना के तहत नवंबर 2025 से मानस के विभिन्न क्षेत्रों से 16 प्रजातियों की देसी घासों का संग्रह किया गया और उन्हें विशेष रूप से तैयार नर्सरी में उगाया गया।
अधिकारियों ने कहा, ‘‘नर्सरी की स्थापना मई 2026 में की गई थी और इसके बड़े पैमाने पर पारिस्थितिक पुनर्स्थापन प्रयासों को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।’’
ये घासभूमियां मानस की पारिस्थितिक रीढ़ हैं और पिग्मी हॉग, बंगाल फ्लोरिकन, हिस्पिड हरे, एक सींग वाले गैंडे, जंगली भैंसे, एशियाई हाथी और बाघ सहित कई वैश्विक रूप से संकटग्रस्त वन्यजीवों को सहारा देती हैं।
इस अवसर पर असम के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन विनय गुप्ता ने कहा कि घासभूमियों का पुनर्स्थापन मानस राष्ट्रीय उद्यान की सर्वोच्च संरक्षण प्राथमिकताओं में से एक है।
उन्होंने कहा, ‘‘नई घास नर्सरी देशी घास प्रजातियों की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करेगी, जो प्रवास पुनर्स्थापन, आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन और महत्वपूर्ण वन्यजीव आवासों की बहाली में सहायक होगी।’’
भाषा अमित नरेश
नरेश

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