नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली के प्रतिष्ठित जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिए जाने के बाद क्लब के कर्मचारियों में चिंता और अनिश्चितता का माहौल छा गया है।
कई कर्मचारी राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक में दशकों तक सेवा देने के बाद अपनी आजीविका खोने से डर रहे हैं।
जिमखाना कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष नंदन सिंह नेगी ने बताया कि कर्मचारियों को शनिवार को ही केंद्र सरकार की क्लब परिसर पर कब्जा करने की योजना के बारे में सूचित कर दिया गया था।
नेगी ने कहा, “हमें कल ही इस बारे में बताया गया। कर्मचारी रात भर मुझे फोन करके पूछते रहे कि उनका क्या होगा और वे कहां जाएंगे।”
क्लब में 35 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारी रामेश्वर ने बताया कि इस अप्रत्याशित आदेश ने कर्मचारियों को इस बात की चिंता में डाल दिया है कि वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कैसे करेंगे।
उन्होंने कहा, “हममें से कई लोगों ने यहां तीन दशक से अधिक समय बिताया है, जबकि अन्य ने 10 से 15 साल तक काम किया है। हमें नहीं पता कि अब हम अपने परिवारों का भरण-पोषण कैसे करेंगे।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जीवन के इस पड़ाव पर कई कर्मचारियों के लिए दूसरी नौकरी ढूंढना मुश्किल होगा।
रविवार को कई कर्मचारी जिमखाना क्लब में इकट्ठा हुए और स्थिति पर स्पष्टता की मांग की।
एक सफाई कर्मचारी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उसने अपना पूरा जीवन क्लब में काम करते हुए बिताया है और अब कुछ ही दिनों में उसे अपना घर और नौकरी दोनों खोने पड़ सकते हैं।
उसने रोते हुए कहा, “मैं अब बूढ़ी हो गई हूं और मैंने अपना पूरा जीवन इस काम को समर्पित कर दिया है। हमारी झुग्गी भी 26 मई को गिराई जानी है। पहले हमारा घर और अब हमारी नौकरी – हम कैसे गुजारा करेंगे?”
उसने कहा कि भविष्य में क्लब को जहां भी स्थानांतरित किया जाएगा, कर्मचारी वहां जाने के लिए तैयार हैं।
सेवानिवृत्त जनरल पी. के. सहगल ने इसे दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित क्लब में से एक बताया और श्रमिकों के सामने मौजूद अनिश्चितता पर चिंता व्यक्त की। वह 1972 से इस क्लब के सदस्य हैं।
सहगल ने कहा, “यहां लगभग 600 श्रमिक कार्यरत हैं और उनमें से कई अब अपनी नौकरी खोने की कगार पर हैं।”
उन्होंने बताया कि नोटिस मिलने के बाद समिति के सदस्यों ने बैठक की और अदालत में इस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया।
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राखी प्रशांत
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