हरियाणा डीएसपी हत्या मामला: अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाना हमेशा रहा है चुनौतीपूर्ण |

हरियाणा डीएसपी हत्या मामला: अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाना हमेशा रहा है चुनौतीपूर्ण

हरियाणा डीएसपी हत्या मामला: अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाना हमेशा रहा है चुनौतीपूर्ण

: , July 20, 2022 / 06:03 PM IST

नूंह, 20 जुलाई (भाषा) हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी को डंपर से कुचलकर मार डालने का मामला यह दर्शाता है कि बार-बार कार्रवाई किए जाने और उच्चतम न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाना अधिकारियों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है।

अवैध पत्थर खनन की जांच कर रहे पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सुरेन्द्र सिंह की मंगलवार को यहां एक ट्रक से कुचलकर हत्या कर दी गई, जिसे उन्होंने रुकने का इशारा किया था।

तावडू के निवासियों के अनुसार खनन के दौरान निकाले गए बड़े-बड़े पत्थर लिए ट्रक अकसर देर रात या तड़के इलाके से गुजरते हैं और इन पत्थरों को आसपास के इलाकों में क्रशर क्षेत्र में डाल दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि अरावली में ऊबड़-खाबड़ क्षेत्र भी अवैध गतिविधियों में मददगार साबित होता है।

सिंह की हत्या का जिक्र करते हुए स्थानीय निवासियों ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि खनन माफिया को कानून का बिल्कुल डर नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2002 में पहली बार और फिर 2009 में फरीदाबाद, गुरुग्राम और मेवात में अरावली के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सभी प्रकार के खनन पर रोक लगा दी थी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने डीएसपी सिंह की हत्या के मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन माफिया को सरकार का संरक्षण मिल रहा है।

हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, ”जब माफिया बिना किसी डर के इतने बड़े पैमाने पर खनन कर रहे हैं, तो इससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें सरकार का संरक्षण मिला हुआ है।”

दिसंबर 2021 में, ओवरलोड वाहनों और अवैध खनन का पता लगाने के लिए चलाए गए रात्रि अभियान के दौरान यहां एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के वाहन को कथित रूप से टक्कर मारने के आरोप में एक ट्रक चालक पर हत्या के प्रयास के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में नूंह अवैध खनन में शामिल 68 वाहनों को जब्त कर लिया गया और 23 प्राथमिकियां दर्ज की गईं। इस अवधि के दौरान नूंह में अवैध खनन करने वालों से 4,28,400 रुपये जुर्माना वसूला गया। नूंह में 2021-22 के दौरान अवैध खनन के खिलाफ लगभग 239 प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने हाल में ‘अरावली बचाओ सिटिजन मूवमेंट’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण बोर्ड और नूंह, गुरुग्राम व फरीदाबाद प्रशासन को संयुक्त समिति बनाने और निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अरावली में कम से कम 16 स्थान पर अवैध खनन किया जा रहा है।

‘अरावली बचाओ सिटिजन मूवमेंट’ अरावली को बचाने के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं का एक समूह है। समूह ने आरोप लगाया था कि अवैध खनन से पर्वतीय क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बर्बाद हो चुका है और इससे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र को बहुत नुकसान होगा। समूह ने कहा है कि अरावली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए फेफड़ों के समान है।

अरावली पर्वतीय क्षेत्र हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में फैला हुआ है और तेंदुए सहित स्तनधारियों, पक्षियों और जंगली जानवरों की कई प्रजातियां यहां रहती हैं।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में खनन की नियमित निगरानी के लिए सैटेलाइट तस्वीरों का उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही भविष्य में किसी भी खनिज के खनन ठेका क्षेत्र से सामग्री ले जाने वाले सभी वाहनों में जीपीएस लगाया जाएगा।

खनन क्षेत्र के पास पुलिस चौकियां स्थापित की जाएंगी। साथ ही अन्य राज्यों की सीमाओं पर अतिरिक्त चौकियां बनाई जाएंगी।

प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने राज्य में अवैध खनन को रोकने के लिए समय-समय पर कड़े कदम उठाए हैं, जिसमें संबंधित उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्य बल (डीएलटीएफ) का गठन भी शामिल है। यह डीएलटीएफ प्रभावित क्षेत्रों का औचक निरीक्षण करता है और जमीनी स्तर पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहता है।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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