फरीदाबाद में एक महिला का शव ठेले पर ले जाने के मामले का हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया
फरीदाबाद में एक महिला का शव ठेले पर ले जाने के मामले का हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया
चंडीगढ़, छह फरवरी (भाषा) हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने परिवहन का खर्च वहन न कर पाने की वजह से परिवार द्वारा फरीदाबाद में 35 वर्षीय महिला के शव को ठेले पर घर ले जाने के मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।
महिला की इलाज के दौरान फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल में मौत हो गई थी।
आयोग ने कहा कि यह घटना आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों के लिए गरिमा, मानवीय व्यवहार और आवश्यक जन सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की राज्य की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
इसमें कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार सिर्फ जैविक अस्तित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गरिमा के साथ जीने और मरने का अधिकार भी शामिल है।
न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले मानवाधिकार आयोग ने चार फरवरी के अपने आदेश में कहा, ‘‘किसी इंसान की गरिमा मौत के बाद खत्म नहीं होती और राज्य की यह जिम्मेदारी होती है कि वह सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार या दफनाने को सुनिश्चित करे। गरीबी के कारण किसी परिवार को अपमानजनक हालात में शव ले जाने के लिए मजबूर करना, गरिमा, समानता और मानवीय व्यवहार के अधिकार का उल्लंघन है।’’
इसने 30 जनवरी को एक अखबार में छपी खबर का संज्ञान लिया।
खबर के मुताबिक, महिला की मौत 28 जनवरी को फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल में हुई। इसके बाद, परिवार से शव को ले जाने के लिए कथित तौर पर 700 रुपये का इंतज़ाम करने को कहा गया, जो वे नहीं दे पाए।
कोई एम्बुलेंस या शव वाहन न मिलने पर, परिवार को खुद ही शव ले जाने का इंतजाम करना पड़ा।
आयोग ने पाया कि शव को एक मोटर वाले ठेले पर रखकर सरूरपुर गांव ले जाया गया, जो पसंद नहीं, बल्कि गरीबी और सरकारी अनदेखी की वजह से मजबूरी में किया गया काम था।
सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने कहा कि एचएचआरसी ने हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा के स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी, फरीदाबाद को अगली सुनवाई की तारीख यानी दो अप्रैल से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी-अपनी कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि घटना के बाद बादशाह खान सिविल अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कहा था कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं, और अगर कर्मचारियों की लापरवाही पाई जाती है, तो कार्रवाई की जाएगी।
भाषा शफीक दिलीप
दिलीप

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