शाह की मौजूदगी में हरियाणा-राजस्थान ने यमुना जल परियोजना के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए
शाह की मौजूदगी में हरियाणा-राजस्थान ने यमुना जल परियोजना के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए
(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) हरियाणा और राजस्थान ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यमुना नदी घाटी के राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ने 12 मई 1994 को नदी जल बंटवारे को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
एमओयू के तहत गठित अपर यमुना नदी बोर्ड (यूवाईआरबी) में उत्तराखंड साल 2000 में शामिल हुआ।
समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए आयोजित इस समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के ज़रिए राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुंचाना है, ताकि राज्य 1994 के एमयोयू (ऊपरी यमुना बेसिन के इस्तेमाल योग्य पानी के बंटवारे पर) के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर सके।
उन्होंने कहा कि इस समझौते से यह सुनिश्चित होगा कि जुलाई से अक्टूबर के बीच यमुना नहर से राजस्थान को तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए 58 करोड़ घन मीटर पानी की आपूर्ति हो।
शाह ने कहा कि इस समझौते ने हरियाणा और राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग तीन दशक पुरानी समस्या का समाधान कर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए ‘‘संवाद से समाधान’ के मंत्र का एक बेहतरीन उदाहरण है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह समझौता दिखाता है कि अगर राज्य सहकारी संघवाद की भावना के साथ आगे बढ़ें, तो तीन दशकों से चली आ रही समस्या का भी आसानी से समाधान किया जा सकता है।’’
शाह ने कहा कि आज हुए समझौते के तहत, जुलाई से अक्टूबर के महीने में तीन भूमिगत पाइपलाइन के जरिए यमुना नहर से राजस्थान को लगभग 58 करोड़ घन मीटर की आपूर्ति की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इन तीनों पाइप का व्यास 3.6 मीटर से ज़्यादा होगा और ये राजस्थान और हरियाणा, दोनों राज्यों के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराएंगी।
शाह ने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के लिए लिए फायदेमंद होने का एक बेहतरीन उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि समझौते में वित्तीय जिम्मेदारियों, लागत-साझाकरण, पानी के आवंटन, पानी छोड़ने के नियमों और रखरखाव की व्यवस्था संबंधी मुद्दों का बारीकी से समाधान किया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक रूप से व्यापक इस समझौते में बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव, निगरानी प्रणालियों, पारदर्शिता के उपायों और विवादों के समाधान की एक मजबूत व्यवस्था को भी बेहतरीन ढंग से शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा, राजस्थान और खासकर केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी)द्वारा तैयार किया गया समझौते मसौदा आने वाले कई दशकों तक विवाद-मुक्त समझौते के तौर पर कायम रहेगा।
शाह ने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में कुछ ही दिनों में समाधान निकल आया।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं ज़िलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद इलाकों में भी पेयजल की आपूर्ति की जाएगी।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह समझौता राजस्थान और हरियाणा, और खासकर राजस्थान में पेयजल की समस्या का समाधान करने में मददगार साबित होगा।
उन्होंने कहा कि जो पानी पहले बेकार बह जाता था, वह अब लोगों की प्यास बुझाएगा और भूजल के पुनर्भरण के लिए बड़े तालाबों में जमा किया जाएगा।
शाह ने कहा कि हरियाणा, राजस्थान और जल शक्ति मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए सहकारी संघवाद के संदेश को वास्तव में हकीकत में तब्दील किया है।
सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पेयजल की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित होने और सामाजिक-आर्थिक विकास से लाखों लोगों को लाभ होने की उम्मीद है।
इसमें कहा गया कि यह समझौता केंद्र सरकार और इसमें शामिल राज्य सरकारों के आपसी सहयोग से इस परियोजना को समय पर लागू करने की नींव भी रखता है।
भाषा धीरज माधव
माधव

Facebook


