स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बजट में बुनियादी ढांचे में सुधार, कुशल मानव संसाधन के विस्तार पर जोर दिये जाने का स्वागत किया

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बजट में बुनियादी ढांचे में सुधार, कुशल मानव संसाधन के विस्तार पर जोर दिये जाने का स्वागत किया

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बजट में बुनियादी ढांचे में सुधार, कुशल मानव संसाधन के विस्तार पर जोर दिये जाने का स्वागत किया
Modified Date: February 2, 2026 / 07:46 pm IST
Published Date: February 2, 2026 7:46 pm IST

नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अस्पताल प्रशासकों ने स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने, कुशल मानव संसाधन के विस्तार और प्रणाली का लचीलापन बढ़ाने पर ज़ोर देने के लिए केंद्रीय बजट 2026–27 का स्वागत किया है।

स्वास्थ्य के लिए अधिक बजट आवंटन, संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने पर जोर, आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल, तथा बायोफार्मा, अनुसंधान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी पहल को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता सुधारने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है, खासकर इसलिए कि इसके लाभ महानगरों से बाहर के क्षेत्रों तक भी पहुंचेंगे।

‘एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया’ (एएचपीआई) के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि 1.06 लाख करोड़ रुपये का आवंटन पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है, जो एक सकारात्मक कदम है।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत के स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए बढ़ा हुआ आवंटन उत्साहजनक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे तृतीय श्रेणी के शहरों में अधिक अस्पताल सुनिश्चित होंगे।

ज्ञानी ने बताया कि हालांकि, आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के बजट में केवल मामूली वृद्धि की गई है और प्रतिपूर्ति दरों को युक्तिसंगत बनाने और अधिक उन्नत अस्पतालों को सूचीबद्ध होने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए इसमें और वृद्धि की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “केंद्रीय बजट 2026-27 स्वास्थ्य सेवा क्षमता के विस्तार, संबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन और मानसिक एवं वृद्धावस्था देखभाल को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करके इस दिशा को और मजबूत करता है। ये सभी महानगरीय केंद्रों से बाहर सेवा उपलब्धता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।’

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट में फैकल्टी एवं रिसर्च के उप डीन एवं कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर सारंग देव ने कहा कि भारत की बदलती जनसांख्यिकीय संरचना और बीमारियों के बढ़ते बोझ के साथ, चिकित्सकों, नर्सों और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों जैसे मुख्य नैदानिक कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने की स्पष्ट आवश्यकता है।

देव ने कहा, “इन कर्मियों को अस्पतालों जैसे पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा वितरण केंद्रों के बाहर भी रोगी देखभाल और कल्याण संबंधी कार्यों को संभालने में सक्षम होना चाहिए।’

भाषा नोमान प्रशांत

प्रशांत


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