स्वास्थ्य सेवा जनहित का विषय, सहानुभूति व सत्यनिष्ठा से सेवा करें चिकित्सा पेशेवर : उपराष्ट्रपति

स्वास्थ्य सेवा जनहित का विषय, सहानुभूति व सत्यनिष्ठा से सेवा करें चिकित्सा पेशेवर : उपराष्ट्रपति

स्वास्थ्य सेवा जनहित का विषय, सहानुभूति व सत्यनिष्ठा से सेवा करें चिकित्सा पेशेवर : उपराष्ट्रपति
Modified Date: April 23, 2026 / 08:17 pm IST
Published Date: April 23, 2026 8:17 pm IST

ऋषिकेश, 23 अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि स्वास्थ्य सेवा जनहित का विषय है और चिकित्सा पेशेवरों को सहानुभूति, सत्यनिष्ठा तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ अपनी सेवाएं देनी चाहिए।

उन्होंने यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)-ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशेवरों की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है। राधाकृष्णन ने निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने तथा सेवा के मूल्यों से प्रेरित रहने का आह्वान किया।

राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों के परिश्रम और अनुशासन की परिणति होने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में 140 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई।

उन्होंने बताया कि वैश्विक जिम्मेदारी के तहत 100 से अधिक देशों को भी टीके उपलब्ध कराए गए, जो “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को दर्शाता है और एक दयालु व जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार पर उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देशभर, विशेषकर वंचित क्षेत्रों में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच मजबूत हुई है।

उपराष्ट्रपति ने एम्स-ऋषिकेश की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने टेलीमेडिसिन पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने हेलीकॉप्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और चारधाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवाओं की आपूर्ति के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी नवाचार पहलों की भी सराहना की।

इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल भी मौजूद थीं।

दीक्षांत समारोह में कुल 386 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें से 318 ने स्वयं उपस्थित होकर डिग्री ग्रहण की।

भाषा

सं, दीप्ति रवि कांत


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