नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अपने फैसला में कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय सीमा सुरक्षा बल समेत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के कर्मियों की सेवा समाप्ति के मामलों की सुनवाई कर सकता है, भले ही कार्रवाई का कारण राष्ट्रीय राजधानी के बाहर क्यों न उत्पन्न हुआ हो।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने बीएसएफ के कांस्टेबल द्वारा दायर याचिका पर पुनर्विचार करते हुए यह आदेश दिया। कांस्टेबल ने याचिका में बिना किसी पेंशन लाभ के अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी।
कांस्टेबल को इस आधार पर बर्खास्त किया गया था कि उसने अपनी पहली पत्नी के रहते हुए बिना उसकी अनुमति के दूसरी शादी कर ली थी।
उसे पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के नारायणपुर में ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था, जहां उसकी तैनाती थी।
कांस्टेबल निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देने में विफल रहा। इसके बाद कमांडेंट ने 2022 में उसे बिना किसी पेंशन लाभ के सेवा से बर्खास्त कर दिया।
बर्खास्तगी के आदेश से व्यथित होकर कांस्टेबल ने सेवा में पुनः बहाली के लिए एक वैधानिक याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया।
सेवा से बर्खास्तगी के आदेशों और अपनी वैधानिक याचिका को खारिज किये जाने के खिलाफ कांस्टेबल ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन इसने भी याचिका खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह याचिका पर सुनवाई के लिए उपयुक्त मंच नहीं है।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
भाषा संतोष सुरेश
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