शिमला, नौ जून (भाषा) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) अपशिष्ट के प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण के क्षेत्र में नॉर्वे के साथ सहयोग की घोषणा की।
सुक्खू ने कहा कि उन्होंने यहां नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सीएंडडी अपशिष्ट प्रबंधन सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने नॉर्वे की कंपनियों को विशेष रूप से पर्यटन, हरित ऊर्जा और भू-तापीय (जियोथर्मल) क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित भी किया।
सुक्खू ने कहा, ‘‘सीएंडडी अपशिष्ट प्रबंधन के अलावा राज्य सरकार नॉर्वे के साथ संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग वाली अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) और संसाधन पुनर्प्राप्ति, सतत पर्यटन एवं कचरा-मुक्त पर्यटन स्थलों, जलवायु-अनुकूल शहरी विकास, नवीकरणीय ऊर्जा एवं हरित परिवर्तन तथा डिजिटल प्रशासन और स्मार्ट शहरों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उसके अनुभवों से सीखने के लिए भी सहयोग करेगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हिमाचल प्रदेश और नॉर्वे प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ सतत विकास को आगे बढ़ाने की समान प्रतिबद्धता साझा करते हैं। मुझे विश्वास है कि यह सहयोग ऐसे नवोन्मेषी समाधान विकसित करेगा, जिनसे न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि दुनिया के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों को भी लाभ होगा।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सतत और पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी शहरी विकास के क्षेत्र में अग्रणी हिमालयी राज्य के रूप में उभरने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम नॉर्वे के संस्थानों, विशेषज्ञों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करने तथा ऐसे नवोन्मेषी और विस्तार योग्य समाधान विकसित करने के लिए आमंत्रित करते हैं, जिन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से अपनाया जा सके।’’
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश ने अपने हरित आवरण को 29.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें युवाओं और समाज के अन्य वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार रसायन-मुक्त प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहित कर रही है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए मक्का, गेहूं, दूध और कच्ची हल्दी पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान कर रही है।
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