भारतीय राजनीति में हिंदू-मुस्लिम एजेंडा हावी, पर बेरोजगारी प्रमुख चिंता; सीजेपी गैर-राजनीतिक: दीपके

भारतीय राजनीति में हिंदू-मुस्लिम एजेंडा हावी, पर बेरोजगारी प्रमुख चिंता; सीजेपी गैर-राजनीतिक: दीपके

भारतीय राजनीति में हिंदू-मुस्लिम एजेंडा हावी, पर बेरोजगारी प्रमुख चिंता; सीजेपी गैर-राजनीतिक: दीपके
Modified Date: June 7, 2026 / 07:27 pm IST
Published Date: June 7, 2026 7:27 pm IST

छत्रपति संभाजीनगर, सात जून (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने रविवार को आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से देश की राजनीति हिंदू-मुस्लिम एजेंडे के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव की मांग की और बेरोजगारी को एक गंभीर मुद्दा बताया।

दिल्ली में आंदोलन का नेतृत्व करने के एक दिन बाद छत्रपति संभाजीनगर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दीपके ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने और सीबीएसई ‘ओएसएम’ की खामियों को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।

उन्होंने प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक एजेंडा तैयार करने का संकल्प लिया।

दीपके ने इस बात पर जोर दिया कि सीजेपी आंदोलन की तुलना कुछ पड़ोसी देशों में हुए प्रदर्शनों से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सीजेपी विशेष रूप से जेन-जेड के लिए है और यह किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं होगी।

‘जेन जेड’ वे युवा हैं, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ।

दीपके ने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि पिछले 10-12 वर्षों में देश की राजनीति हिंदू-मुस्लिम एजेंडे पर केंद्रित हो गई है। यह मुद्दा रोजगार पैदा नहीं कर सकता। हमें राजनीति के इस केंद्रबिंदु को बदलना होगा और सरकार की प्राथमिकताएं भी बदलनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हम शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने के लिए एक एजेंडा तैयार करेंगे। यह यहीं खत्म नहीं होगा, क्योंकि रोजगार भी देश का एक अहम मुद्दा है।’’

दीपके ने कहा कि नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की जिम्मेदारी किसी को तो लेनी ही चाहिए, जिससे बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं।

दीपके ने प्रधान के इस्तीफे की मांग को सही ठहराते हुए कहा, ‘‘अगर कोई जिम्मेदारी नहीं लेगा तो व्यवस्था कुशलता से कैसे काम कर सकती है? अगर किसी कंपनी को किसी व्यक्ति की वजह से नुकसान हो रहा है, तो क्या उस व्यक्ति के इस्तीफे तक वह नुकसान मुनाफे में बदल जाएगा?’’

उन्होंने कहा, ‘‘किसी व्यक्ति को कुछ गलतियों के बाद कंपनी से निकाल दिया जाता है, लेकिन यहां सरकार द्वारा आयोजित परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बार-बार लीक हो रहे हैं।’’

उन्होंने पूछा, ‘‘हम कैसे विश्वास करें कि आप (सरकार) अपनी गलतियां स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, जब तक कि इस्तीफा अंतिम रूप से मंजूर नहीं हो जाता?’’

उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों के बारे में लगाए गए आरोपों की भी कड़ी आलोचना की।

दीपके ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, ‘‘जंतर-मंतर पर भारी भीड़ और तस्वीरें लोगों के बारे में खुद बयां करती हैं। वे कितने लोगों को पाकिस्तानी कहेंगे? क्या वे आंदोलनकारी छात्रों, विपक्ष और सवाल पूछने वाले मीडिया को पाकिस्तानी कहेंगे?’’

उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या सत्ताधारी दलों के आईटी प्रकोष्ठ के लोग सिर्फ भारतीय हैं?’’

दीपके ने कहा कि ‘तिलचट्टा’ (कॉकरोच) शब्द के विरोध में एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में शुरू हुए सीजेपी आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों में हुए आंदोलनों से नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि यहां (भारत में) एक व्यवस्था है। जो लोग हमारे आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों में हुए आंदोलनों से करते हैं, उन्हें यह जानना चाहिए कि जंतर-मंतर आंदोलन बहुत शांतिपूर्ण था। आंदोलन में शामिल युवा देश के कोने-कोने से आए थे।’’

दीपके ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी उनके कथित आलोचनात्मक बयान को लेकर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, ‘‘फडणवीस को बोलने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि वे महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के मुख्यमंत्री हैं, उत्तर प्रदेश के नहीं। मेरे पास डॉ. आंबेडकर की तस्वीर वाली एक किताब है। क्या सत्ताधारी दल के नेता (फडणवीस) का मतलब यह था कि आंबेडकर की तस्वीर दिखाना अराजकता है? क्या उनके अनुसार ‘जय भीम’ का नारा लगाना अराजकता है?’’

दीपके ने इस बात पर जोर दिया कि सीजेपी किसी भी राजनीतिक दल से संबंध नहीं रखेगी, और संकेत दिया कि आंदोलन को बाहरी समर्थन स्वीकार्य है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं से बात नहीं की है। यह आंदोलन ‘जेनरेशन जेड’ के लिए है। जो लोग हमारा समर्थन करना चाहते हैं, वे बाहर से हमारा समर्थन कर सकते हैं, लेकिन हम किसी भी राजनीतिक दल से खुद को नहीं जोड़ेंगे।’’

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश


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