आईआईटी मद्रास ने प्रतिवर्ष 100 टन ई-अपशिष्ट के प्रसंस्करण में सक्षम प्रायोगिक संयंत्र विकसित किया

आईआईटी मद्रास ने प्रतिवर्ष 100 टन ई-अपशिष्ट के प्रसंस्करण में सक्षम प्रायोगिक संयंत्र विकसित किया

आईआईटी मद्रास ने प्रतिवर्ष 100 टन ई-अपशिष्ट के प्रसंस्करण में सक्षम प्रायोगिक संयंत्र विकसित किया
Modified Date: June 14, 2026 / 03:49 pm IST
Published Date: June 14, 2026 3:49 pm IST

चेन्नई, 14 जून (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (आईआईटी-एम) के शोधकर्ताओं ने एक स्वदेशी प्रायोगिक संयंत्र विकसित किया है, जो प्रतिवर्ष 100 टन इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट का प्रसंस्करण करने में सक्षम है।

आईआईटी मद्रास की ओर से रविवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, यह संयंत्र प्रतिवर्ष 100 टन ‘प्रिंटेड सर्किट बोर्ड’ (पीसीबी) के उपचार के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसे भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के तिरुचिरापल्ली में स्थित परिसर में स्थापित किया गया है।

यह संयंत्र बेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड को संसाधित करता है, जो इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट के सबसे खतरनाक और धातुओं से भरपूर घटकों में से एक है।

पीसीबी में तांबा, सीसा और टिन जैसी धातुएं पर्याप्त मात्रा में होती हैं। यदि ई-वेस्ट का उचित प्रबंधन नहीं किया जाए, तो ये धातुएं मिट्टी और भूजल में रिसकर लंबे समय तक पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।

ऐसे समय में जब भारत में हर वर्ष लगभग 50 लाख मीट्रिक टन ई-अपशिष्ट उत्पन्न हो रहा है, आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा विस्तार योग्य (स्केलेबल) और उत्सर्जन मुक्त प्रायोगिक संयंत्र विकसित एवं प्रदर्शित किया है, जो फेंके गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिट्टी, पानी या वायु को प्रदूषित किए बिना मूल्यवान धातुएं निकाल सकता है।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश


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