भारत में अभी कोविड-19 टीके की बूस्टर खुराक देने की जरूरत नहीं: विशेषज्ञ

भारत में अभी कोविड-19 टीके की बूस्टर खुराक देने की जरूरत नहीं: विशेषज्ञ

Edited By: , September 18, 2021 / 03:47 PM IST

(शकूर राठेर)

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) क्या कोविड रोधी टीके की ‘बूस्टर’ (तीसरी) खुराक कोरोना वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भारत की जरूरत के अनुरूप बढ़ा सकती है? इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि आबादी के अधिकांश हिस्से का पूर्ण टीकाकरण हो जाने पर ही यह एक आदर्श स्थिति होगी।

कोविड रोधी टीके की बूस्टर खुराक लगाने पर वैश्विक चर्चा गति पकड़ रही है। यहां कई वैज्ञानिकों ने कहा है कि प्राथमिकता इस स्थिति को देनी चाहिए, जिसमें अधिकतर लोगों को टीके की कम से कम एक खुराक लग गई हो।

प्रतिरक्षा वैज्ञानिक सत्यजीत रथ ने कहा कि भारत में 15 फीसदी से कम वयस्कों को टीके की दोनों खुराकें लगी हैं और इससे साफ है कि संक्रमण के प्रति संवेदनशील सभी भारतीयों को टीके की दोनों जरूरी खुराकें नहीं लगी है।

दिल्ली के राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (एनआईआई) से संबंधित रथ ने पीटीआई-भाषा से कहा कि उन्हें लगता है कि इस वक्त तीसरी खुराक देने की योजना बनाना नैतिक तौर पर जल्दबाजी है।

उन्होंने कहा, “ अभी हमें साफ-साफ यह पता नहीं है कि संक्रमण के प्रति कौन अधिक संवेदनशील है। हमें यह भी नहीं पता है ऐसी कौन सी बीमारियां हैं जो (संक्रमण के कारण) गंभीर रूप से बीमार कर सकती हैं, लेकिन मौजूदा टीकों की दोनों खुराकें उन सभी के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा देती हैं।”

प्रतिरक्षा विज्ञानी विनीता बल ने भी इस बात पर सहमति जताई है कि भारत को इस स्तर पर वर्धक खुराक देने के बारे में विचार नहीं करना चाहिए, जब देश की करीब 40 फीसदी आबादी को टीके की पहली खुराक ही नहीं लगी है।

उनका मानना है कि पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित संवेदनशील लोगों को मामला-दर-मामला आधार पर टीके की अतिरिक्त खुराक देने के बारे में विचार किया जा सकता है।

पुणे स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंसाधन संस्थान में अतिथि संकाय विनीता ने कहा, “लेकिन यह याद रखना होगा कि अतिरिक्त खुराक वायरस के विशिष्ट रूपों को कवर नहीं करती है जो अधिक ‘खतरनाक’ माने जाते हैं।”

उन्होंने कहा, “ रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिहाज़ से अतिरिक्त खुराक की उपयोगिता सीमित होगी।”

बहरहाल, भारत ने अभी टीके की तीसरी खुराक लगाना शुरू नहीं किया है, लेकिन ऐसी खबरें हैं कि मुंबई में कुछ स्वास्थ्य कर्मियों और राजनीतिक नेताओं ने टीके की तीसरी खुराक लगवाई है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि बूस्टर खुराक देना फिलहाल मुख्य विषय नहीं है और टीके की दो खुराकें लगाना पहली प्राथमिकता है।

को-विन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने शुक्रवार को 2.5 करोड़ से अधिक कोविड रोधी टीके लगाए, जिसके बाद देश में 79.33 करोड़ से अधिक खुराकें लगाई जा चुकी हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इसी के साथ, भारत की 63 फीसदी आबादी को टीके की पहली खुराक लग चुकी है जबकि 21 प्रतिशत जनसंख्या का पूर्ण टीकाकरण किया जा चुका है।

रथ के मुताबिक, दुनियाभर में इस्तेमाल किए जा रहे है कोविड के सभी मौजूदा टीके संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार होने या मौत से बचाव के लिए बहुत प्रभावी है और तीसरी खुराक की जरूरत नहीं है।

‍वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘ कुछ महीने के बाद एंटीबॉडी कम होती हैं यह न तो आश्चर्यजनक है और न ही यह सुरक्षा में किसी भी तरह की कमी आने का संकेत देता है।”

अनुसंधानकर्ता नगा सुरेश वीरपु ने कहा कि मृत्यु दर को कम करने के लिए पूरी तरह से टीकाकृत आबादी के भीतर संक्रमण के बढ़ते जोखिम वाले जनसंख्या समूहों की पहचान करना जरूरी है।

आईसीएमआर के क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी), भुवनेश्वर के हाल के एक अध्ययन में पाया गया कि कोवैक्सीन टीका लगवाने वाले लोगों में बनने वाली एंटीबॉडी दो महीने बाद कम होना शुरू हो जाती हैं जबकि कोविशील्ड टीका लगवाने लोगों में तीन महीने के बाद एंटीबॉडी कम होने लग जाती हैं।

इस तरह के नतीजे दुनिया के अन्य हिस्सों में इस्तेमाल किए जा रहे टीकों में भी देखने को मिले हैं। फाइज़र और मॉडर्ना ने इस हफ्ते के शुरू में कहा था कि समय के साथ उनके टीकों से सुरक्षा कम हो सकती है।

बल ने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि पूर्ण टीकाकरण गंभीर रूप से बीमार पड़ने से सुरक्षा प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि क्लिनिकल परीक्षणों में शामिल होने वाले लोगों को सबसे पहले टीका लगाया गया और उनकी बाद की जांच से पता चला कि गंभीर रूप से बीमार पड़ने से कम से कम 8-10 महीने तक या संभवत: इससे ज्यादा समय तक सुरक्षा मिलती है।

‘द लांसेट’ जर्नल में इस हफ्ते प्रकाशित एक समीक्षा में कहा गया है कि टीका कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार होने से सुरक्षा प्रदान करता है, यहां तक कि यह वायरस के डेल्टा स्वरूप के खिलाफ भी सुरक्षा देता है और इस स्तर पर आम आबादी के लिए बूस्टर की जरूरत नहीं है।

कई देशों ने कोविड रोधी टीके की बूस्टर खुराक लगाना शुरू कर दिया है। 30 जुलाई को इज़राइल ने 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को फाइजर टीके की बूस्टर खुराक देने को मंजूरी दे दी थी।

ब्रिटेन ने बृहस्पतिवार को टीके की बूस्टर खुराक देने की शुरुआत की है जो स्वास्थ्य कर्मियों को लगाई जा रही है।

भाषा

नोमान सुभाष

सुभाष