राज्यसभा में दवाओं की कीमत, अर्थव्यवस्था और जनजातीय विकास के मुद्दे उठे
राज्यसभा में दवाओं की कीमत, अर्थव्यवस्था और जनजातीय विकास के मुद्दे उठे
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को शून्यकाल के दौरान दवाओं की कीमतों में असमानता, महिलाओं पर देखभाल कार्य के बोझ, महंगाई और जनजातीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन सहित जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए गए और सरकार से इनके समाधान की मांग की गई।
भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने सरकार से समान घटक (सॉल्ट) वाली दवाओं के लिए समान मूल्य निर्धारण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को नर्सिंग होम द्वारा महंगी ब्रांडेड दवाएं दी जा रही हैं, जिससे योजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
बाजपेयी ने कहा कि समान सॉल्ट वाली गोलियां विभिन्न ब्रांडों में अलग-अलग कीमतों पर बेची जा रही हैं, जो गरीब मरीजों का आर्थिक शोषण है।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, ड्रग मूल्य नियंत्रण आदेश और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के तहत कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
भाजपा की ही रेखा शर्मा ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और लाखों महिलाएं समाज की रीढ़ हैं, लेकिन उनका पर्याप्त मूल्यांकन नहीं होता।
रेखा शर्मा ने कहा कि मिशन शक्ति, पोषण 2.0 और सक्षम आंगनवाड़ी जैसी योजनाओं ने मजबूत ढांचा तैयार किया है, लेकिन सामाजिक सोच में बदलाव भी आवश्यक है। उन्होंने पुरुषों से बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में समान भागीदारी निभाने की अपील की।
भाजपा के ही चुन्नीलाल गरासिया ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के क्रियान्वयन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और प्रतापगढ़ जैसे जनजातीय बहुल जिलों को इसमें प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
चुन्नीलाल गरासिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अक्टूबर 2024 में शुरू की गई इस योजना के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 63,000 से अधिक जनजातीय गांवों को कवर किया जा रहा है, जिससे लगभग पांच करोड़ जनजातीय नागरिकों के उत्थान की संभावना है।
उन्होंने दक्षिणी राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में अधिक योजनाएं लागू करने की मांग की ताकि समुदायों को पूर्ण लाभ मिल सके।
मनोनीत सदस्य पीटी ऊषा ने थैयम कलाकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी से गुजर रहे थैयम कलाकारों को सहानुभूति नहीं चाहिए बल्कि काम चाहिए। उन्होंने कहा कि इन कलाकारों के लिए अपनी कला को बचाए रखते हुए वर्तमान दौर के साथ चलना मुश्किल हो रहा है।
ऊषा ने सरकार से थैयम कलाकारों के लिए एक कल्याण बोर्ड बनाने, उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने, उनके लिए पेंशन की व्यवस्था करने और उनके बच्चों को ऊंची शिक्षा देने की व्यवस्था करने की मांग की।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू ने कहा कि जम्मू कश्मीर के कई गांव आज भी बिजली से वंचित हैं। उन्होंने कहा ‘‘वहां के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है। सड़कें खस्ताहाल हैं। शिक्षण संस्थान अपर्याप्त हैं। पिछले बारह साल में वहां एक भी स्कूल या अस्पताल नहीं खोला गया।’’
उन्होंने कहा कि सबको साथ लेकर चलने का, सबका विकास करने का नारा देने से कुछ नहीं होगा बल्कि जम्मू कश्मीर की वास्तविक समस्याओं पर गौर कर उनका समाधान निकालना चाहिए।
कांग्रेस की रजनी अशोकराव पाटिल ने कहा कि महंगाई बढ़ने से लागत में भी वृद्धि हो रही है और इसका प्रभाव खास तौर पर निम्न वर्ग और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण हालात और बिगड़ गए हैं।
उन्होंने पेट्रोल, डीजल, दालें, खाद्य तेल और सब्जियों का बफर स्टॉक रखने तथा कीमतों को कम रखने के लिए हर कदम उठाने की मांग की।
भाजपा के धैर्यशील मोहन पाटिल ने हापुस आम का मुद्दा उठाया। बीजद के सुभाशीष खुंटिया ने पुरी में योग विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की।
शून्यकाल में ही भाजपा के सिकंदर कुमार, रेखा शर्मा, पाका वेंकट सत्यनारायण, डॉ दिनेश शर्मा और एस सेल्वागनबेथी ने भी आसन की अनुमति से लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने मुद्दे उठाए।
भाषा मनीषा वैभव
वैभव

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