(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) भारत और अमेरिका ने रविवार को अपने तनावपूर्ण संबंधों में सुधार के संकेत देने के प्रयास किए। विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो ने व्यापार, वीजा, ऊर्जा सुरक्षा, सीमा पार आतंकवाद और पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभावों जैसे जटिल मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
चार दिवसीय दौरे पर भारत आए रूबियो ने नयी दिल्ली को एक प्रमुख ताकत बताया और इस बात को खारिज किया कि अमेरिका-भारत संबंधों ने दो दशकों से चली आ रही गति खो दी है।
उन्होंने दृढ़ता से कहा कि मौजूदा प्रशासन के कार्यकाल के अंत तक ये संबंध और भी मजबूत होंगे।
भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए जयशंकर ने वैश्विक स्थिरता के लिए एक रणनीतिक पांच-सूत्री खाका प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि भारत संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थक है, निर्बाध समुद्री व्यापार का समर्थन करता है, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की मांग करता है और बाजार हिस्सेदारी तथा संसाधनों के ‘हथियार’ बनाए जाने के खिलाफ है।
भारत-अमेरिका संबंधों में आई भारी गिरावट के बाद अपने पहले व्यापक संवाद में, दोनों पक्षों ने मुख्य रूप से रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, उच्च प्रौद्योगिकी और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया।
जयशंकर के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में रूबियो ने ‘पीटीआई-भाषा’ के एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘अमेरिका-भारत संबंधों में कोई कमी नहीं आई है। मैं समझता हूं कि कुछ लोग ऐसा क्यों कह सकते हैं। मैं नहीं समझता, लेकिन मैं जनाता हूं कि कुछ लोग ऐसा कहते हैं। यह भारत के बारे में नहीं है। यह व्यापार के संदर्भ में अमेरिका के बारे में है।’’
रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर एकमत हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, विश्व में हमारे सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है।’’
वाशिंगटन द्वारा भारत पर दंडात्मक शुल्क लगाए जाने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के रुकने में अपनी भूमिका बताने के संबंध में विवादास्पद बयान दिए जाने के बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई।
जयशंकर ने कहा, ‘‘मैं भारत का व्यापक रुख स्पष्ट करना चाहता हूं… और मैं यहां पांच बिंदु रखना चाहूंगा। पहला, हम संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करते हैं। दूसरा, हम सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार का समर्थन करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘तीसरा, हम अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्ण सम्मान की मांग करते हैं। चौथा, हम बाजार हिस्सेदारी और संसाधनों को हथियार बनाने के खिलाफ हैं। और पांचवां, हम वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिममुक्त करने के लिए विश्वसनीय साझेदारी और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं के महत्व में विश्वास करते हैं।’’
मामले से परिचित लोगों के अनुसार, वार्ता में जयशंकर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पश्चिम एशिया संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को किस प्रकार गंभीर रूप से प्रभावित किया है और आर्थिक परेशानियों को जन्म दिया है।
विदेश मंत्री ने भारत के लिए ऊर्जा के कई स्रोतों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऊर्जा बाजार को ‘‘विकृत’’ नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘होर्मुज में वर्तमान स्थिति से निपटने का हमारा तरीका, और स्पष्ट रूप से कहें तो भविष्य में भी, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना है, क्योंकि यही हमारी ऊर्जा सुरक्षा का आधार है, और इसीलिए हम दृढ़ता से मानते हैं कि ऊर्जा बाजार को विकृत या प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘वैश्विक विकास के लिए ऊर्जा की कीमतों को कम रखना महत्वपूर्ण है।’’
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके अमेरिका, इजराइल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमारा वहां वास्तविक हित है। हमारे लिए, इस स्थिति में चुनौती यह है कि इन सभी संबंधों को कैसे बनाए रखा जाए, अपने हितों की रक्षा कैसे की जाए और अपने हितों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। हम इसे प्रतिस्पर्धा की ऐसी लड़ाई नहीं मानते जिसमें किसी एक को जीतने के लिए दूसरे को हारना पड़े।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘हम स्वाभाविक रूप से इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहते हैं।’’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार का पक्षधर है।
ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में जयशंकर ने कहा कि अमेरिका से भारत के ऊर्जा आयात में ‘‘काफी वृद्धि’’ हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार सुनिश्चित करने में भारत और अमेरिका दोनों की गहरी रुचि है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें कम रखने और ऊर्जा स्रोतों की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी हमारी गहरी रुचि है।’’
संवेदनशील भू-राजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत के अमेरिका, रूस, यूरोप, यूक्रेन और दुनिया भर के अन्य देशों के साथ मजबूत संबंध हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सवाल यह है कि इन सभी संबंधों को कैसे संभाला जाए। इस लिहाज से, यह बहु-संरेखण है क्योंकि आज के भारत के हित इतने व्यापक हैं कि हमें कई पहलुओं का प्रबंधन करना पड़ता है।’’
विदेश मंत्री ने ट्रंप प्रशासन की ओर से वीजा और आव्रजन नीतियों में किए गए बदलावों को लेकर भारत की चिंताएं उठाईं और कहा कि इस नीतिगत बदलाव से वैध आवागमन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
रूबियो ने माना कि अमेरिका द्वारा आव्रजन प्रणाली में सुधार किए जाने के प्रयासों के दौरान संक्रमण काल में कुछ ‘अड़चनें’ और ‘टकराव के बिंदु’ आ सकते हैं, लेकिन अंततः एक ‘कुशल’ ढांचा सभी हितधारकों के लिए मददगार होगा।
रूबियो ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की वर्तमान प्रक्रिया भारत को लक्षित करने के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी आप कोई सुधार करते हैं, जब भी आप लोगों को प्रवेश देने की प्रणाली में कोई बदलाव करते हैं, तो एक संक्रमणकालीन दौर आता है, जिसमें कुछ मतभेद और कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।’’
रूबियो ने कहा, ‘‘यह प्रणाली भारत को लक्षित करके नहीं बनाई गई है, यह एक ऐसी प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है। लेकिन हम संक्रमणकालीन दौर से गुजर रहे हैं, और किसी भी संक्रमणकालीन दौर की तरह, इस रास्ते में भी कुछ बाधाएं तो आएंगी ही।”
आर्थिक संबंधों से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर देते हुए रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका जल्द ही बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तैयार हैं, जो ‘लाभदायक’ और ‘स्थायी’ दोनों होगा तथा दोनों देशों के आपसी हितों को आगे बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने जबरदस्त प्रगति की है और मुझे लगता है कि हम अमेरिका और भारत के बीच एक ऐसे व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे जो दीर्घकालिक होगा, दोनों पक्षों के लिए लाभदायक होगा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए स्थायी होगा।’’
वाशिंगटन के पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ते सौहार्दपूर्ण संबंधों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में रूबियो ने कहा, ‘‘अन्य देशों के साथ हमारे संबंधों की बात करें तो, हमारे संबंध हैं और हम दुनिया भर के देशों के साथ कई मायनों में सामरिक स्तर पर काम करते हैं, भारत भी ऐसा ही करता है, जैसे हर जिम्मेदार राष्ट्र करता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं दुनिया के किसी भी देश के साथ अपने संबंधों को भारत के साथ हमारे रणनीतिक संबंध की कीमत पर नहीं देखता।’’
अपने संबोधन में जयशंकर ने भारत और अमेरिका की साझा चुनौतियों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें सबसे अहम आतंकवाद है। इस संबंध में हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। हम इस मामले में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस क्षेत्र में हमारे दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग की हम सराहना करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पिछले साल 26/11 मुंबई हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता के अमेरिका से भारत में प्रत्यर्पण को विशेष रूप से ध्यान में रखा। हमारे दोनों देश द्विपक्षीय रूप से, साथ ही प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग को और मजबूत करेंगे। हम अवैध व्यापार का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।’’
कुछ घंटों बाद जयशंकर ने रूबियो के साथ अपनी बातचीत को ‘‘अच्छी चर्चा’’ बताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “व्यापार और ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, परमाणु और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध, आतंकवाद और मादक पदार्थों के खिलाफ सहयोग सहित हमारी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के पूरे दायरे की हमने समीक्षा की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मंगलवार को क्वाड के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में रूबियो और ऑस्ट्रेलिया तथा जापान के हमारे सहयोगियों के साथ शामिल होने के लिए उत्सुक हूं।’’
रूबियो ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की। रूबियो ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पद भी संभालते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘चर्चा रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी से संबंधित सहयोग पर केंद्रित थी, जिसमें ‘ट्रस्ट’ पहल भी शामिल है।”
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने द्विपक्षीय व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को दी जाने वाली उच्च प्राथमिकता को दोहराया। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।’’
अमेरिकी दूतावास ने कहा, ‘‘विदेश मंत्री रूबियो ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल के साथ आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका-भारत रणनीतिक समन्वय को मजबूत करने पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। साझा सुरक्षा हितों के समर्थन में हमारी साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।’’
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘विदेश मंत्री रूबियो का संदेश स्पष्ट है। भारत के साथ हमारे संबंध मायने रखते हैं। भारत के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी वास्तविक है। हमारे सामने अपार संभावनाएं हैं।’’
भाषा संतोष नेत्रपाल
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