जेएनयू सामाजिक न्याय के लक्ष्य में विफल, अजा-अजजा नामांकन में 25 प्रतिशत गिरावट: दिग्विजय सिंह

जेएनयू सामाजिक न्याय के लक्ष्य में विफल, अजा-अजजा नामांकन में 25 प्रतिशत गिरावट: दिग्विजय सिंह

जेएनयू सामाजिक न्याय के लक्ष्य में विफल, अजा-अजजा नामांकन में 25 प्रतिशत गिरावट: दिग्विजय सिंह
Modified Date: April 1, 2026 / 12:53 pm IST
Published Date: April 1, 2026 12:53 pm IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) अपने सामाजिक न्याय के दायित्व को व्यवस्थित रूप से कमजोर कर रहा है।

उन्होंने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के नामांकन में 25 प्रतिशत की गिरावट, आरक्षित श्रेणी के संकाय पदों में भर्ती में अनियमितताओं और कुलपति की कथित टिप्पणियों का हवाला भी दिया।

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह विडंबना है कि जेएनयू के दो प्रतिष्ठित पूर्व छात्र सत्ता पक्ष में बैठे हैं, लेकिन राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में शीर्ष 10 विश्वविद्यालयों में शामिल यह संस्थान अपने मूल उद्देश्यों—राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय—से भटक रहा है।

उन्होंने हाल में मीडिया में आईं कुछ कथित टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जेएनयू की कुलपति ने ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के दावों को कथित तौर पर “पीड़ित होने की स्थायी मानसिकता” बताया और संकेत दिया कि ऐसी वास्तविकताएं बनाई गईं हैं।

उन्होंने कहा, “इस तरह के बयान संस्थान की, जातिगत भेदभाव, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करते हैं।”

जेएनयू शिक्षक संघ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मात्र तीन वर्षों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के नामांकन में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है।

संकाय भर्ती के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 326 रिक्तियों के लिए चयन समितियों का गठन किया गया लेकिन 40 प्रतिशत से अधिक मामलों में उम्मीदवारों को “उपयुक्त नहीं पाया गया” घोषित किया गया। अधिकतर रिक्त पद आरक्षित श्रेणी के थे।

उन्होंने यह भी बताया कि जेएनयू में संकाय पदोन्नति के 89 मामले लंबित हैं, जिनमें से 62 निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय से लंबित हैं, जिससे करियर प्रगति और पीएचडी मार्गदर्शन क्षमता प्रभावित हो रही है।

दिग्विजय सिंह ने सरकार से आग्रह किया कि जेएनयू और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण मानदंडों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और समावेशिता के संवैधानिक संकल्प की रक्षा की जाए।

भाषा

मनीषा वैभव

वैभव


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