केरल: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार को अंतिम विदाई

केरल: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार को अंतिम विदाई

केरल: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार को अंतिम विदाई
Modified Date: June 7, 2026 / 06:16 pm IST
Published Date: June 7, 2026 6:16 pm IST

कोच्चि, सात जून (भाषा) केरल में रविवार को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार को भावभीनी विदाई दी गई। कुमार का अंतिम संस्कार उनके नॉर्थ परवूर स्थित आवास पर पुलिस सम्मान के साथ किया गया और हजारों लोगों ने लोकप्रिय अभिनेता को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

वह 56 वर्ष के थे।

कुमार का शनिवार रात करीब 10.43 बजे यहां एक निजी अस्पताल में निमोनिया के इलाज के दौरान निधन हो गया।

रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को नॉर्थ परवूर टाउन हॉल ले जाया गया, जहां अभिनेताओं, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन सहित राजनीतिक नेताओं और प्रशंसकों सहित हजारों लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए।

केरल में मिमिक्री कलाकार के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले कुमार ने मलयालम सिनेमा के सबसे बहुमुखी कलाकारों में से एक के रूप में स्वयं को स्थापित किया ।

अपराह्न करीब दो बजे शव को उनके नॉर्थ परवूर स्थित आवास ‘लाफिंग विला’ ले जाया गया।

अंतिम संस्कार अपराह्न करीब 3.30 बजे हुआ और इसमें बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

कुछ साल पहले लिवर प्रतिरोपण करवा चुके अभिनेता को शनिवार सुबह अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

परिवार के सूत्रों के अनुसार, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने आखिरी सांस ली।

मलयालम सिनेमा में जाना-पहचाना चेहरा रहे कुमार ने 1990 के दशक के आखिर में फिल्मी जगत में कदम रखने से पहले ‘मिमिक्री’ और हास्य के माध्यम से पहचान हासिल की। ​​उन्होंने 1997 में फिल्म जगत में पदार्पण किया लेकिन 2000 के दशक में उनके हास्य अभिनय ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई।

फिल्म उद्योग में आने से पहले कुमार केरल के मिमिक्री जगत में एक प्रमुख हस्ती थे। उन्होंने केरल के ‘कलाभवन’ के साथ राज्य और विदेशों में कई कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया और बाद में अपना खुद का ‘ग्रुप’ बनाया।

वह थिएटर में भी सक्रिय थे और मलयालम टेलीविजन चैनलों पर कॉमेडी कार्यक्रमों की मेजबानी करते थे।

कुमार ने 1997 में सिद्दीक-शमीर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘इष्टमनु नूरु वट्टम’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की।

उन्हें प्रमुख सफलता ‘सत्यमेव जयते’ से मिली जिसने उन्हें मलयालम सिनेमा के अग्रणी हास्य कलाकारों में से एक के रूप में स्थापित किया।

कई सफल फिल्मों में हास्य भूमिकाएं निभाने के बाद कुमार ने गंभीर किरदारों को निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।

निर्देशक कमल की फिल्म ‘पेरुमाझक्कलम’ (2004) में उनके शानदार अभिनय ने उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया।

उन्होंने ‘अचनुरंगथा वीडू’ में अपने अभिनय के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार में द्वितीय सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता और बाद में ‘अदामिंते मकान अबू’ (2010) में उनके प्रशंसित अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और केरल राज्य फिल्म पुरस्कार दोनों प्रदान किए गए।

अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए मशहूर कुमार ने लगभग तीन दशकों के अपने करियर में हास्य से लेकर गंभीर चरित्र भूमिकाएं निभाईं और 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उनकी आखिरी फिल्म 2025 में रिलीज़ हुई ‘भा भा बा’ थी जिसमें वह मेहमान भूमिका में नजर आए थे।

कुमार ने लेखक और निर्देशक के रूप में भी फिल्म निर्माण में कदम रखा।

फिल्म उद्योग में अपार लोकप्रियता के बावजूद कुमार ने कभी अपने राजनीतिक झुकाव को नहीं छिपाया और खुले तौर पर खुद को कांग्रेस पार्टी का समर्थक बताया।

कोच्चि के महाराजा कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह छात्र इकाई केरल छात्र संघ (केएसयू) के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे और कला क्लब के सचिव के रूप में उन्होंने कार्य किया।

कुमार अक्सर अपने पिता की कांग्रेस के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के बारे में बात किया करते थे और अक्सर यही कहा करते थे कि वह छोटी उम्र से ही पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं।

हाल में हुए केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कुमार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) का खुले तौर पर समर्थन किया। वह कई मौकों पर गठबंधन के नेताओं के साथ दिखाई दिए और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के नेतृत्व की आलोचना की।

केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें ‘‘ एक फिल्मी सितारे से कहीं बढ़कर भाई और परिवार का सदस्य’’ बताया।

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘सलीम कुमार उत्तर परवूर का गौरव थे। गरीबी और कठिनाइयों का सामना करने वाले एक साधारण परिवार में जन्मे सलीम कुमार ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर भारतीय सिनेमा के शिखर को छुआ।’

सतीशन ने इस बात का भी जिक्र किया कि कुमार आखिरी बार कुछ दिन पहले परवूर के लोगों द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

फिल्म जगत और राजनीति से जुड़े लोगों ने अभिनेता के निधन पर शोक व्यक्त किया।

देश के राष्ट्रीय नेताओं ने भी अभिनेता के निधन पर शोक व्यक्त किया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कुमार को मलयालम फिल्म उद्योग का दिग्गज बताया।

गांधी ने कहा, ‘राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता (जिन्होंने लाखों लोगों को हंसाया और अपने शानदार अभिनय से लोगों का दिल भी जीता) का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। मैं इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा हूं।’

अभिनेता ममूटी ने ‘फेसबुक’ पर लिखा, ‘‘सलीम, आप हंसते थे और दूसरों को हंसाते थे। आप गहराई से सोचते थे और दूसरों को सोचने पर मजबूर करते थे। जब आप रोते थे तो दूसरों की आंखें भी नम हो जाया करती थीं। लेकिन अब, आप हमें रोता हुआ छोड़कर चले गए। आपका जाना एक अंतहीन दुख बन गया है, भाई।’’

केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने भी अस्पताल जाकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।

गोपी ने पत्रकारों से कहा, ‘वह एक असाधारण व्यक्ति थे जिन्होंने हास्य में नए आयाम खोजे। मुझे उनके साथ कई फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। हालांकि हमारे राजनीतिक विचार अलग-अलग थे, फिर भी हमारे बीच एक गहरा रिश्ता था।’

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कुमार को जीवन पर्यंत कांग्रेस समर्थक रहे घनिष्ठ मित्र के रूप में याद किया, जिनके हास्य, स्नेह और राजनीतिक दृढ़ विश्वास ने उनके आसपास के सभी लोगों पर अमिट छाप छोड़ी।

उनके परिवार में उनकी पत्नी सुनीता और दो बेटे चंदू और आरोमल हैं।

भाषा

शुभम नरेश

नरेश


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