कोयल जलाशय परियोजना का खाका तैयार, छह वर्ष में अनुमानित लागत 808 करोड़ रूपये बढ़ी |

कोयल जलाशय परियोजना का खाका तैयार, छह वर्ष में अनुमानित लागत 808 करोड़ रूपये बढ़ी

कोयल जलाशय परियोजना का खाका तैयार, छह वर्ष में अनुमानित लागत 808 करोड़ रूपये बढ़ी

: , October 11, 2022 / 07:41 PM IST

नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) सरकार ने कई दशकों से अटकी बिहार एवं झारखंड से संबद्ध उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना को अगले तीन वर्षो में पूरा करने का खाका तैयार किया है हालांकि करीब छह वर्ष में इस परियोजना की अनुमानित लागत 808.49 करोड़ रूपये बढ़ गयी है।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सलाहकार समिति की 150वीं बैठक के कार्यवृत (मिनट्स) से यह जानकारी प्राप्त हुई है। यह बैठक 19 सितंबर को हुई थी ।

इसमें कहा गया है कि ‘‘ विस्तृत चर्चा के बाद विभाग की सलाहकार समिति ने उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना को स्वीकार कर लिया। ’’

दस्तावेज के अनुसार, संशोधित लागत समिति (आरसीसी) ने दिसंबर 2021 में आठवीं बैठक में 3199.55 करोड़ रूपये के अनुमानित लागत की सिफारिश की थी। इसमें 31 मार्च 2016 तक हुआ 769.09 करोड़ रूपये का खर्च तथा शेष कार्य को पूरा करने के लिये 2,430.76 करोड़ रूपये लागत अनुमान शामिल है तथा इस परियोजना को 2024-25 तक पूरा किया जाना है।

परियोजना की संशोधित लागत समिति ने भी 15 जुलाई 2022 को इन अनुमानों पर विचार किया था।

वहीं, संशोधित लागत समिति (आरसीसी) की वर्ष 2016 में हुई छठी बैठक में 2016-17 के मूल्य स्तर पर 2,391.36 करोड़ रूपये के अनुमानित लागत की सिफारिश की गई थी । इसमें परियोजना पर 31 मार्च 2016 तक हुआ 769.09 करोड़ रूपये का खर्च तथा शेष कार्य को पूरा करने के लिये 1,622.27 करोड़ रूपये लागत अनुमान शामिल है ।

अतिरिक्त सचिव ने कहा कि गया सहायक नदी के संबंध में समय पर भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा करना चाहिए क्योंकि यह परियोजना के लिये अहम है।

दस्तावेज के अनुसार, इस बात पर जोर दिया गया है कि परियोजना को समय पर पूरा करने के लिये भूमि अधिग्रहण गतिविधि महत्वपूर्ण है। अभी बिहार सरकार का 294.71 हेक्टेयर भूमि तथा झारखंड सरकार को 16.62 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित करना बाकी है।

इसमें कहा गया है कि झारखंड सरकार के प्रतिनिधि में कहा कि 117.58 करोड़ रूपये का एकमुश्त पैकेज जारी होने के बाद सुरक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं होगा । वहीं, बिहार सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि गया खंड में भूमि अधिग्रहण का कोई मुद्दा नहीं होगा और कार्य समय पर पूरा हो जायेगा ।

गौरतलब है कि उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना वर्ष 1972 में शुरू हुई थी । यह परियोजना वर्ष 1993 में नये वन संरक्षण अधिनियम (1980) के सख्ती से लागू होने के कारण रूक गयी । तब तक इसके तहत मोहम्मदगंज बराज का कार्य पूरा हो गया था ।

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मंडला बांध के गेट स्थापित किये जाने के मुद्दे पर यह कहते हुए आपत्ति व्यक्त की थी कि बांध में पानी जमा होने से बेतला राष्ट्रीय पार्क को खतरा उत्पन्न हो जायेगा तथा पलामू बाघ अभयारण्य के बफर जोन की वन भूमि डूब जायेगी । इसके बाद, मंडला बांध की ऊंचाई को कम करके 341 नियत कर दिया गया था ।

इस परियोजना के पूरा होने से बिहार के औरांगाबाद और गया तथा झारखंड के पलामू एवं गढ़वा जिले के सूखा से प्रभावित रहने वाले इलाकों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी तथा एक बड़े क्षेत्र को पेजयल की सुविधा प्राप्त होगी।

भाषा दीपक

दीपक माधव

माधव

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)