लेह/जम्मू, 24 मई (भाषा) उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने स्पितुक के पास लगभग 800 एकड़ बंजर भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने और मीठे पानी की नयी पुनर्भरण तकनीक के माध्यम से इसे एक उत्पादक पारिस्थितिकी तंत्र में तब्दील करने के लिए रविवार को एक महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की।
यह लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में भू-क्षरण को रोकने के उद्देश्य से उपराज्यपाल द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रायोगिक परियोजना उपराज्यपाल सक्सेना के निर्देशों पर शुरू की गई है, जिसके तहत लेह के स्पितुक गांव के पास लगभग 800 एकड़ भूमि की पहचान की गई है। यह भूमि सदियों से बंजर पड़ी है।
उन्होंने बताया, “इस पहल का उद्देश्य हाल ही में पुनर्स्थापित इगू-फे सिंचाई नहर के अतिरिक्त पानी का उपयोग करना है। नहर के पानी को ट्रैक्टर और अन्य मशीनों का उपयोग कर अस्थायी नालों के जरिये बंजर भूमि पर ले जाया जाएगा।”
अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में वार्षिक वर्षा 100 मिलीमीटर से भी कम होती है और यह ग्लेशियर के पिघले पानी पर अत्यधिक निर्भर है।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य मीठे पानी को मिट्टी में फैलने और रिसने देकर स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बदलना है, जिससे कम हो चुके जलभंडार का पुनर्भरण होगा, भूजल स्तर बहाल होगा और प्राकृतिक वनस्पति का विकास होगा।
अधिकारियों ने बताया कि मिट्टी की नमी में सुधार और विश्वसनीय सिंचाई सहायता मिलने से, पुनर्स्थापित भूमि का उपयोग अंततः फसल की खेती और पशुपालन के लिए किया जा सकता है, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।
उपराज्यपाल ने कहा कि लगभग 800 एकड़ बंजर भूमि को इगू-फे नहर के अतिरिक्त पानी से सींचा जा रहा है ताकि मिट्टी में नमी बढ़े।
उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2030 तक देश भर में 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
भाषा जितेंद्र सुभाष
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