लोकसभा सचिवालय ने सांसदों का निजी विदेश यात्रा संबंधी नियमों के प्रति ध्यान फिर आकृष्ट किया |

लोकसभा सचिवालय ने सांसदों का निजी विदेश यात्रा संबंधी नियमों के प्रति ध्यान फिर आकृष्ट किया

लोकसभा सचिवालय ने सांसदों का निजी विदेश यात्रा संबंधी नियमों के प्रति ध्यान फिर आकृष्ट किया

: , July 21, 2022 / 03:12 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) लोकसभा सचिवालय ने अपने एक बुलेटिन में फिर से स्पष्ट किया है कि संसद सदस्यों को गैर सरकारी यात्रा पर विदेश जाने से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक स्वीकृति एवं गृह मंत्रालय से एफसीआरए अनुमति प्राप्त करने के बाद लोकसभा अध्यक्ष को यात्रा के उद्देश्य की जानकारी देनी चाहिए।

लोकसभा सचिवालय की कांफ्रेंस शाखा की ओर से जारी ‘संसद सदस्यों द्वारा विदेशों के गैर अधिकारिक दौरे’ शीर्षक वाले 20 जुलाई के बुलेटिन में यह बात दोहरायी गई है। इसमें कहा गया कि सांसदों के गैर सरकारी विदेशी यात्रा के दौरान किसी भी कार्यकलाप से यह प्रतीत नहीं होना चाहिए कि वे आधिकारिक यात्रा पर हैं ।

बुलेटिन के अनुसार, यदि संसद सदस्य को किसी भी विदेशी स्रोत जिनमें किसी देश की सरकार, विदेशी संगठनों आदि से सीधे कोई निमंत्रण प्राप्त होता है तो ऐसे निमंत्रण पत्र की एक प्रति, दौरों के उद्देश्य तथा स्वीकार किये जाने वाले आतिथ्य के पूर्ण विवरण के साथ राजनीतिक स्वीकृति के लिये विदेश मंत्रालय के पास भेजा जानी चाहिए। इसके अनुसार ऐसी यात्रा के दौरान किसी भी विदेशी आतिथ्य की स्वीकृति हेतु गृह मंत्रालय के विदेश प्रभाग (एफसीआरए) के सचिव को भेजा जाना चाहिए ।

इसमें कहा गया है कि विदेश मंत्रालय से राजनीतिक स्वीकृति और गृह मंत्रालय से एफसीआरए अनुमति प्राप्त होने के बाद संबंधित सदस्य को लोकसभा अध्यक्ष को अन्य बातों के साथ साथ दौरों के उद्देश्य एवं प्राप्त किये जाने वाले आतिथ्य के बारे में सूचित करना चाहिए ।

बुलेटिन में कहा गया है कि ‘ कृपया यह सुनिश्चित किया जाए कि उन दौरों के दौरान उनके किसी भी कार्यकलाप से यह प्रतीत नहीं होना चाहिए कि संसद सदस्य, संसद की ओर से आधिकारिक दौरे पर हैं ।

सांसदों से कहा गया है कि ऐसे निमंत्रण को स्वीकार करने से पहले उन्हें आतिथ्य प्रदान करने वाले संबंधित संगठनों/संस्थान की विश्वसनीयता के संबंध में पूर्णत: आश्वस्त होना चाहिए ।

लोकसभा सचिवालय की बुलेटिन में कहा गया है कि सदस्य कृपया इसमें सहयोग दें ।

ज्ञात हो कि इस वर्ष मई महीने में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ब्रिटेन के दौरे और खास तौर पर ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोरबिन के साथ उनकी मुलाकात पर विवाद उत्पन्न हो गया था। ऐसे आरोप लगे थे कि कांग्रेस सांसद ने निर्धारित प्रक्रिया को छोड़ अपनी यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं मांगी। वहीं, इसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा के पास सभी उचित अनुमति थी।

इस विवाद के दौरान, कांग्रेस ने प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि ब्रिटेन दौरे पर गए राहुल गांधी सांसद हैं तथा वह किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी नहीं थे, इसलिए उन्हें इस दौरे के लिए सरकार से ‘राजनीतिक मंजूरी’ लेने की कोई जरूरत नहीं थी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोरबिन के साथ राहुल गांधी की मुलाकात को लेकर सवाल उठाये थे ।

भाषा दीपक

दीपक माधव

माधव

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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