मद्रास उच्च न्यायालय ने ‘जन नायकन’ को सेंसर प्रमाणपत्र देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द किया

मद्रास उच्च न्यायालय ने ‘जन नायकन’ को सेंसर प्रमाणपत्र देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द किया

मद्रास उच्च न्यायालय ने ‘जन नायकन’ को सेंसर प्रमाणपत्र देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द किया
Modified Date: January 27, 2026 / 11:47 am IST
Published Date: January 27, 2026 11:47 am IST

चेन्नई, 27 जनवरी (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एकल न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सीबीएफसी को अभिनेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को सेंसर प्रमाणपत्र देने का निर्देश दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की प्रथम पीठ ने कहा कि एकल न्यायाधीश, न्यायमूर्ति पी टी आशा को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय देना चाहिए था।

इस फैसले से फिल्म का भविष्य लगभग अनिश्चित हो गया है, जिसे पहले इसी महीने पोंगल के मौके पर रिलीज किया जाना था। बताया जा रहा है कि यह विजय की आखिरी फिल्म होगी, जिसके बाद वह पूरा समय राजनीति को देंगे।

उच्च न्यायालय ने ‘जन नायकन’ के निर्माता को मामले के शीघ्र निपटारे के लिए एकल न्यायाधीश का रुख करने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश इस बात का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं कि मामले को पुनरीक्षण समिति को भेजने का निर्णय सही है या नहीं।

पीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद 20 जनवरी को न्यायमूर्ति आशा द्वारा पारित एक आदेश के खिलाफ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा दायर अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

न्यायमूर्ति आशा ने नौ जनवरी को फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माता एम/एस केवीएन प्रोडक्शन्स एलएलपी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए सीबीएफसी को तत्काल सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था।

न्यायाधीश ने क्षेत्रीय अधिकारी की पांच जनवरी की उस सूचना को भी रद्द कर दिया, जिसमें फिल्म के निर्माता को बताया गया था कि एक शिकायत के आधार पर सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष ने मामले को पुनरीक्षण समिति के पास भेज दिया है। हालांकि, उसी दिन उच्च न्यायालय की प्रथम पीठ ने न्यायमूर्ति आशा के आदेश पर रोक लगा दी थी।

इससे पहले 22 दिसंबर 2025 को निर्माता को चेन्नई स्थित क्षेत्रीय अधिकारी से एक सूचना प्राप्त हुई थी, जिसमें बताया गया था कि फिल्म देखने वाली पांच सदस्यीय समीक्षा समिति ने फिल्म के प्रदर्शन की सिफ़ारिश की है और सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने की अनुशंसा की है।

इसके बाद, समीक्षा समिति के एक सदस्य की शिकायत के आधार पर अध्यक्ष ने 22 दिसंबर की उक्त सूचना को रोकने का फैसला किया और मामले को पुनरीक्षण समिति को भेज दिया। इस निर्णय की जानकारी फिल्म के निर्माता को पांच जनवरी को दी गई थी।

भाषा

गोला मनीषा

मनीषा


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