जल शक्ति मंत्रालय ने पानी की गुणवत्ता की जांच, निगरानी के ढांचे संबंधी दिशानिर्देश जारी किए

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जल शक्ति मंत्रालय ने पानी की गुणवत्ता की जांच, निगरानी के ढांचे संबंधी दिशानिर्देश जारी किए

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  • Publish Date - March 13, 2021 / 12:52 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:43 PM IST

नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) जल शक्ति मंत्रालय ने शनिवार को पेयजल की गुणवत्ता की जांच और निगरानी के ढांचे संबंधी दिशानिर्देश जारी किए, साथ ही इस उद्देश्य से संबंधित प्रयोगशालाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाले ऑनलाइन पोर्टल ‘‘वाटर क्वालिटी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम’’ (डब्ल्यूक्यूआईएमएस) की भी शुरुआत की।

दिशा-निर्देशों में राज्य, जिला, ब्लॉक/तहसील और गांव के स्तर पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए किए जाने वाले कार्यों को स्पष्ट किया गया है।

दिशा-निर्देश के तहत पानी की गुणवत्ता के संबंध में सामान्य पैरामीटर .. पीएच मानक, पूरी तरह घुलनशील पदार्थ, गंदगी, क्लोराइड, खारापन, सल्फेट, आयरन, आर्सेनिक, फ्लोरॉयड, नाइट्रेट, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, ई-कोलाई आदि को बताया गया है।

दिशा-निर्देश भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की सलाह से तैयार किए गए हैं।

जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने पत्रकारों से कहा कि ‘जल जीवन मिशन’ का लक्ष्य 2024 तक हर गांव के हर घर में नल से पीने योग्य पानी पहुंचाने का है और पानी की गुणवत्ता इसका महत्वपूर्ण पहलू है।

उन्होंने बताया कि ‘जल जीवन मिशन’ की कुल लागत 3,60,000 करोड़ रुपये है और इस राशि का दो प्रतिशत पानी की गुणवत्ता पर खर्च किया जाएगा।

केन्द्रीय भूजल बोर्ड द्वारा 2018 में किए गए मूल्यांकन के अनुसार, देश के सभी ब्लॉक में से 52 प्रतिशत के पानी में कोई ना कोई भूगर्भीय तत्व जैसे आर्सेनिक, क्लोराइड, फ्लोरॉयड, आयरन, नाइट्रेट या लवणता मौजूद है।

देश के करीब 20 राज्य ऐसे हैं जहां जल स्रोत आर्सेनिक, फ्लोरॉयड, नाइट्रेट, आयरन, खारापन या भारी धातु से प्रदूषित हैं।

इनके अलावा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने पांच राज्यों में 61 ऐसे जिलों की पहचान की है जो जापानी बुखार से प्रभावित हैं।

भाषा अर्पणा मनीषा

मनीषा