मोदी सरकार वास्तविकता से कटी हुई है, एलपीजी की कमी को स्वीकार नहीं कर रही: सागरिका घोष

मोदी सरकार वास्तविकता से कटी हुई है, एलपीजी की कमी को स्वीकार नहीं कर रही: सागरिका घोष

मोदी सरकार वास्तविकता से कटी हुई है, एलपीजी की कमी को स्वीकार नहीं कर रही: सागरिका घोष
Modified Date: March 26, 2026 / 05:01 pm IST
Published Date: March 26, 2026 5:01 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की उपनेता सागरिका घोष ने बृहस्पतिवार को सरकार पर ‘‘एलपीजी की कमी’’ को स्वीकार न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार वास्तविकता से कटी हुई है और नागरिकों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास नहीं कर रही है।

घोष ने आरोप लगाया कि सरकार संकट का दोष और बोझ आम जनता पर डालने की कोशिश कर रही है।

तृणमूल सांसद ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी सरकार वास्तविकता से पूरी तरह से कटी हुई है। देश भर में, छोटे भोजनालय, रेस्तरां, लघु उद्योग, अनौपचारिक क्षेत्र तथा श्रमिक, गृहिणी, वरिष्ठ नागरिक और छात्र, सभी एलपीजी गैस की इस गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मोदी सरकार इस वास्तविकता को स्वीकार करने को बिल्कुल तैयार नहीं है। वह कह रही है, ‘घबराइए मत।’ जैसे कि इस आपात स्थिति में घबराने के लिए नागरिक ही जिम्मेदार हों…।’’

उन्होंने कहा कि लोगों का घबराना जाहिर है। घोष ने कहा कि सरकार ने आवश्यक सामग्री का भंडारण क्यों नहीं किया।

तृणमूल कांग्रेस सांसद ने सवाल किया, ‘‘बेशक, एलपीजी नहीं मिल सकने और इसकी कमी की आशंका होने पर नागरिक घबरा जाएंगे। सरकार ने एलपीजी का भंडारण क्यों नहीं किया है? एलपीजी संकट से निपटने के लिए कोई उचित कार्य योजना क्यों नहीं है?’’

उन्होंने पूछा, ‘‘अगर लोग घर पर खाना नहीं बना पा रहे हैं, अगर रेस्तरां और छोटे भोजनालय भोजन नहीं दे पा रहे हैं, तो इसका क्या मतलब है?’’

घोष ने कहा कि यह सिर्फ कमी की बात नहीं है, बल्कि ‘‘नरेन्द्र मोदी सरकार की चौतरफा विफलता है जो अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।’’

तृणमूल ने बुधवार को मोदी सरकार द्वारा पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में भाग नहीं लिया। पार्टी ने इसे लेकर यह सवाल किया कि जब संसद का सत्र जारी है तो सदन में चर्चा क्यों नहीं हो रही है और बैठक ‘‘सम्मेलन कक्ष’’ में क्यों की जा रही है।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य के बाद, उच्च सदन में विपक्ष को प्रश्न पूछने की अनुमति न दिये जाने पर घोष ने आपत्ति जताई थी।

भाषा सुभाष वैभव

वैभव


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