लिंग आधारित भेदभाव के विरूद्ध एक माह तक चलने वाला राष्ट्रीय अभियान शुरू |

लिंग आधारित भेदभाव के विरूद्ध एक माह तक चलने वाला राष्ट्रीय अभियान शुरू

लिंग आधारित भेदभाव के विरूद्ध एक माह तक चलने वाला राष्ट्रीय अभियान शुरू

: , November 29, 2022 / 07:56 PM IST

नयी दिल्ली, 25 नवंबर (भाषा) लिंग आधारित भेदभाव के विरूद्ध एक महीने तक चलने वाला राष्ट्रीय अभियान शुरू करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सरकार लैंगिक हिंसा को खत्म करने के लिए कटिबद्ध है।

महिला विरोधी हिंसा उन्मूलन अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री सिंह ने 13 राज्यों में लैंगिक हिंसा के प्रति संवेदनशील 160 संसाधन केंद्रों का डिजिटल तरीके से उद्घाटन भी किया।

महिलाओं के विरूद्ध हिंसा खत्म किए जाने पर जोर देते हुए सिंह ने उनसे हिंसा बर्दाश्त नहीं करने का आह्वान किया और लिंग आधारित भेदभाव को खत्म करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर की।

सिंह ने कहा, ‘‘ मोदी सरकार जिस तरह विकास के लिए प्रतिबद्ध है, उसी तरह वह महिला सशक्तीकरण के लिए भी प्रतिबद्ध है। मोदी सरकार में महिलाओं को सेना में भी शामिल किया गया है।’’

मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

इस मौके पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री निरंजन ज्योति ने कहा कि ‘सनातन’ धर्म ने महिलाओं को समान दर्जा दिया है। उन्होंने वर्तमान लैंगिक भेदभाव के लिए आक्रांताओं के हमलों एवं उनकी वजह से आये सांस्कृतिक परिवर्तनों को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा, ‘‘ भारत में सदैव नारी की पूजा की गई है। लैंगिक भेदभाव भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘ आक्रांताओं के आक्रमणों के बाद, सुंदर महिलाओं का अपहरण किया जाता था, इसलिए पर्दा प्रथा अस्तित्व में आयी….. यह हमारी परंपरा नहीं है।’’

मंत्री ने एक घटना का भी उल्लेख किया जब एक बस संचालक ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने उसे चार तमाचे जड़े… हमें मजबूत होने की जरूरत है, तब कोई हमें छूने की हिम्मत नहीं करेगा। मेरे पिता पढ़े-लिखे नहीं हैं, मैं 14 साल की उम्र में संन्यासी बन गयी, किसी ने भी मुझ पर नजर डालने की हिम्मत नहीं की।’’

ग्रामीण विकास सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने भी कहा कि महिलाओं को हिंसा बर्दाश्त नहीं करना चाहिए और मदद मांगना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ हिंसा बर्दाश्त करना उचित नहीं है। यदि कहीं कोई हिंसा होती है तो उन्हें (पीड़िता को) सहयोग मांगना चाहिए। हमें उन महिलाओं को महत्व देना चाहिए जिन्होंने लैंगिक हिंसा की स्थिति में सहयोग मांगा है। उन्हें (समाज में) नायिका बनाया जाना चाहिए।’’

भाषा

राजकुमार मनीषा

मनीषा

 

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