केरल में सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के निजीकरण की कोई योजना नहीं : मंत्री मुरलीधरन
केरल में सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के निजीकरण की कोई योजना नहीं : मंत्री मुरलीधरन
तिरुवनंतपुरम, सात जून (भाषा) केरल के स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन ने रविवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के निजीकरण की कोई योजना नहीं है। उन्होंने संबंधित खबरों को ‘‘फर्जी’’ बताकर खारिज कर दिया।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुरलीधरन ने कहा कि उन्हें कई ऐसी खबरें मिली हैं, जिनमें दावा किया गया है कि सरकार सरकारी अस्पतालों के निजीकरण की योजना बना रही है।
राजकीय नर्स एसोसिएशन के हालिया बयान का जिक्र करते हुए मंत्री ने ऐसी चिंताओं के आधार पर सवाल उठाया।
राजकीय नर्स एसोसिएशन ने कहा था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के निजीकरण के किसी भी कदम का विरोध किया जाएगा।
मंत्री ने पूछा, ‘‘किसने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र का निजीकरण होने जा रहा है? अगर सभी सरकारी अस्पतालों का निजीकरण हो जाता है, तो क्या मैं इस पद पर बना रह सकता हूं? क्या एक लोकतांत्रिक सरकार ऐसा सोच सकती है?’’
मुरलीधरन ने कहा कि सरकारी अस्पताल भवनों के निर्माण के लिए बड़ी कंपनियों से प्राप्त होने वाले कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधि का इस्तेमाल करने के बारे में उनकी हालिया टिप्पणियों की गलत व्याख्या की गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘सीएसआर निधि स्वीकार करने के लिए हमें उन कंपनियों को कोई विशेष लाभ पहुंचाने की आवश्यकता नहीं है। सीएसआर निधि जन कल्याणकारी गतिविधियों के लिए ही होती है।’’
मंत्री ने कहा कि हाल में जारी श्वेतपत्र में राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकारी निधि से पूरी तरह से नये अस्पताल भवनों का निर्माण करना चुनौतीपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘चिकित्सक-जनसंख्या अनुपात में सुधार करना होगा, जिसके लिए अतिरिक्त व्यय की आवश्यकता होगी। लंबित देनदारियां और पर्याप्त वित्तीय प्रतिबद्धताएं हैं। इन सबके साथ-साथ, अस्पताल का विकास आसान नहीं है। इसलिए, कंपनियों से प्राप्त सीएसआर योगदान का इस्तेमाल किया जाएगा।’’
मुरलीधरन ने कहा कि सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की कीमत पर निजी मेडिकल कॉलेज को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोई नीति नहीं अपनाएगी।
भाषा संतोष पारुल
पारुल

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