ईडी में सुधार के लिए ऑनलाइन सुझाव: सख्त समयसीमा तय करने और स्वतंत्र ऑडिट पर जोर
ईडी में सुधार के लिए ऑनलाइन सुझाव: सख्त समयसीमा तय करने और स्वतंत्र ऑडिट पर जोर
नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कामकाज में सुधार के लिए प्राप्त ऑनलाइन सार्वजनिक प्रतिक्रिया में जांच पूरी करने के लिए सख्त तय समयसीमा निर्धारित करने और एजेंसी पर विश्वास बढ़ाने के लिए स्वतंत्र ऑडिट लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
एजेंसी ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि ये निष्कर्ष ईडी की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार के ‘माईगॉव प्लेटफॉर्म’ पर आयोजित राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान का हिस्सा थे।
केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि ‘ईडी के कामकाज में सुधार के लिए सुझाव आमंत्रित’ शीर्षक से यह प्रतिक्रिया प्रक्रिया 30 अप्रैल से 30 मई तक आयोजित की गई और इससे बहुत जरूरी सार्वजनिक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
ईडी ने कहा कि उसे 2,340 लोगों ने अपनी राय दी और नागरिकों से 876 सुझाव प्राप्त हुए।
बयान के मुताबिक, “जन परामर्श प्रक्रिया से कई रचनात्मक सुझाव सामने आए हैं और जनता से प्राप्त कुछ प्रमुख सुझावों का उल्लेख किया गया है।”
इन सुझावों में मामलों के त्वरित निपटारे के लिए जांच के संबंध में सख्त समयसीमा निर्धारित करना, जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए स्वतंत्र लेखापरीक्षा, निगरानी तंत्र व जवाबदेही प्रणाली लागू करना और मजबूत सुरक्षा उपायों के साथ एक सुरक्षित ‘व्हिसलब्लोअर’ और नामों को उजागर किये बिना रिपोर्टिंग प्रणाली बनाना शामिल है।
अन्य सुझावों में धन शोधन व वित्तीय धोखाधड़ी का तेजी से पता लगाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) व बिग डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करना, अधिक पारदर्शिता के लिए एक डिजिटल केस एवं शिकायत-निगरानी पोर्टल विकसित करना और बैंकों, एफआईयू, आरबीआई, जीएसटी तथा पुलिस के साथ अंतर-एजेंसी डेटा साझाकरण व समन्वय को मजबूत करना शामिल है।
ईडी की स्थापना एक मई, 1956 को आर्थिक मामलों के विभाग में ‘प्रवर्तन इकाई’ के रूप में विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन से निपटने के लिए की गई थी।
एक वर्ष बाद, 1957 में इकाई का नाम बदलकर प्रवर्तन निदेशालय कर दिया गया।
यह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है।
भाषा जितेंद्र दिलीप
दिलीप

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