नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) तेलंगाना में 556 अधेड़ और बुजुर्ग लोगों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) के अधिक जोखिम वाले लोगों में विटामिन डी, बी2, बी6 और बी9 की कमी इस बीमारी (डिमेंशिया) के कम जोखिम वाले लोगों से अधिक थी।
यह अध्ययन ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये नतीजे दिखाते हैं कि शरीर में विटामिन का सही स्तर रखकर डिमेंशिया के खतरे को कम किया जा सकता है।
अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों में से 39 प्रतिशत लोगों में डिमेंशिया का जोखिम पाया गया। यह दिमाग से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जिसमें धीरे-धीरे सोचने-समझने, याद रखने और बोलने की शक्ति कम होने लगती है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर)-राष्ट्रीय पोषण संस्थान और स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट सहित अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने ‘विशेष रूप से भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किए गए हृदय संबंधी जोखिम कारकों, वृद्धावस्था और डिमेंशिया जोखिम से जुड़े सीएआईडीई स्कोर की मदद से डिमेंशिया के जोखिम का अनुमान लगाया। इस आकलन में आयु, बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), शारीरिक गतिविधि, रक्तचाप और कुल कोलेस्ट्रॉल से संबंधित जानकारियों का उपयोग किया गया।
टीम ने यह भी पाया कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में डिमेंशिया का जोखिम अधिक था।
अध्ययन के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में कम मोटापे, कम हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (उच्च कोलेस्ट्रॉल) और अधिक शारीरिक गतिविधि के सुरक्षात्मक प्रभाव भी डिमेंशिया के इस जोखिम को कम नहीं कर सके।
अध्ययन में शामिल लोगों में विटामिन बी2 की कमी सबसे ज्यादा (64 फीसदी) देखी गई। इसके बाद करीब 47 फीसदी लोगों में विटामिन बी12, 42 फीसदी में विटामिन डी और 34 फीसदी लोगों में विटामिन बी6 की कमी पाई गई।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को डिमेंशिया का खतरा ज्यादा था, उनके शरीर में कम खतरे वाले लोगों के मुकाबले विटामिन डी, बी1, बी9 और बी12 की बहुत ज्यादा कमी थी।
उन्होंने कहा कि ये निष्कर्ष इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि किसी व्यक्ति के शरीर में विटामिन का स्तर डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण और बदलाव योग्य कारक हो सकता है।
विश्लेषण से यह भी पता चला कि अन्य कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी विटामिन डी की कमी का डिमेंशिया के जोखिम से गहरा संबंध बना रहा।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने साफ किया कि यह अध्ययन एक निश्चित समय पर जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए, इससे सिर्फ विटामिन की कमी और डिमेंशिया के बीच का संबंध पता चलता है, यह साबित नहीं होता कि विटामिन की कमी ही इस बीमारी की मुख्य वजह है।
भाषा सुमित पवनेश
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