पीएमके ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से राज्य में जाति जनगणना कराने की अपील की

पीएमके ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से राज्य में जाति जनगणना कराने की अपील की

पीएमके ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से राज्य में जाति जनगणना कराने की अपील की
Modified Date: June 9, 2026 / 06:21 pm IST
Published Date: June 9, 2026 6:21 pm IST

(तस्वीर के साथ)

चेन्नई, नौ जून (भाषा) पट्टालि मक्कल काच्चि ( पीएमके) के नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने मंगलवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से तमिलनाडु में जाति जनगणना कराने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की।

रामदास ने सचिवालय में मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें एक पत्र सौंपा। बाद में उसकी प्रति मीडिया को जारी की गई।

विजय को सौंपे पत्र में उन्होंने कहा,‘‘ तमिलनाडु एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने सामान्य 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर 69 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। यह एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने संविधान की नौवीं अनुसूची में इस सीमा को शामिल करने का प्रयास किया था। हालांकि अब यह आरक्षण खतरे में है।’’

उन्होंने बताया कि 69 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देने वाले मामले में उच्चतम न्यायालय ने 13 जुलाई 2010 के अपने फैसले में इसे बरकरार रखा और साथ ही यह निर्देश दिया कि आरक्षण की सही सीमा निर्धारित करने के लिए एक वर्ष के भीतर जाति जनगणना कराई जाए।

जाति जनगणना कराए बिना आरक्षण की पुष्टि किए जाने का आरोप लगाते हुए कुछ पक्षों ने 2012 में 69 प्रतिशत की सीमा के खिलाफ फिर से मामले दायर किए।

रामदास ने कहा, ‘‘जब इस साल 27 मई को इन मामलों की सुनवाई हुई, तो उच्चतम न्यायालय ने कुछ संबंधित याचिकाओं को इस आधार पर खारिज कर दिया कि कुछ विद्यार्थी याचिकाकर्ताओं ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी, लेकिन दो मुख्य मामले अब भी लंबित हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन मामलों की सुनवाई किसी भी समय उच्चतम न्यायालय में हो सकती है।’’

पीएमके नेता ने कहा, ‘‘यदि तमिलनाडु जाति जनगणना के माध्यम से यह साबित नहीं कर पाता कि आरक्षित समुदायों की जनसंख्या का अनुपात 69 प्रतिशत आरक्षण को उचित ठहराता है तो इस बात का असल खतरा है कि 69 प्रतिशत की सीमा को रद्द कर दिया जाए। इसलिए, 69 प्रतिशत आरक्षण की रक्षा के लिए तमिलनाडु में जाति आधारित जनगणना (जिसे आमतौर पर सामाजिक न्याय सर्वेक्षण कहा जाता है) कराना आवश्यक है।’’

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


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