भारत में कोविड के बाद एवीएन के कारण युवाओं में सर्जरी के मामले 40 प्रतिशत बढ़े: विशेषज्ञ
भारत में कोविड के बाद एवीएन के कारण युवाओं में सर्जरी के मामले 40 प्रतिशत बढ़े: विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) भारत में कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद ऑर्थोपेडिक चिकित्सा में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है और चिकित्सकों के मुताबिक कूल्हे के गठिया (हिप आर्थराइटिस) और ‘एवास्कुलर नेक्रोसिस’ (एवीएन) के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है।
‘एवास्कुलर नेक्रोसिस’वह स्थिति है जिसमें कूल्हे की हड्डी में रक्त की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्तकों का क्षय होने लगता है। यह एक दर्दनाक स्थिति है, जो विशेष रूप से युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के वयस्कों में देखी जा रही है।
नयी दिल्ली के क्राउन प्लाजा होटल में रविवार को आयोजित दूसरे ‘दिल्ली हिप 360’ सम्मेलन में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि कोविड के बाद के दौर में कूल्हे के जोड़ों को नुकसान तेजी से बढ़ा है और देश भर में टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) सर्जरी की मांग में वृद्धि हुई है।
दिल्ली ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ने इंडियन आर्थ्रोप्लास्टी एसोसिएशन के सहयोग से इस सम्मेलन का आयोजन किया।
चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि ‘एवास्कुलर नेक्रोसिस’ कभी मुख्य रूप से वृद्ध वयस्कों या आघात के रोगियों में देखा जाता था लेकिन अब यह समस्या 30 से 40 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को भी तेजी से प्रभावित कर रही है।
कई मामलों में देरी से निदान होने के कारण बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती रहती है, यहां तक कि कूल्हे का जोड़ पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है और फिर से सामान्य जीवन जीने के लिए पूरे कूल्हे की सर्जरी की आवश्यकता होती है।
‘दिल्ली हिप 360’ के आयोजन अध्यक्ष और दिल्ली के मैक्स अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक डॉ. एल. तोमर ने बताया, “युवाओं में कूल्हे की सर्जरी में 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है।”
उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के दौरान स्टेरॉयड ने जीवन रक्षक की भूमिका निभाई लेकिन कुछ रोगियों में जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल या लंबे समय तक इनके उपयोग से ‘ऑस्टियोनेक्रोसिस’ और कूल्हे के जोड़ में होने वाले बदलाव में वृद्धि देखी गई।
डॉ. तोमर ने बताया, “अब हम अपेक्षाकृत कम उम्र के ऐसे रोगियों को देख रहे हैं, जो कूल्हे की गंभीर क्षति, फीमर हेड के क्षतिग्रस्त होने और गठिया की गंभीर समस्या की शिकायत लेकर आ रहे हैं तथा इन्हें शीघ्र कूल्हे की सर्जरी की आवश्यकता है।”
डॉ. तोमर ने बताया कि प्रारंभिक निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर ‘एवास्कुलर नेक्रोसिस’ का पता प्रारंभिक अवस्था में चल जाए तो कूल्हे को होने वाली परेशानी से पहले ही जोड़ों को सुरक्षित रखने वाली प्रक्रियाएं संभव हो सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय आर्थोपेडिक पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध से पता चला कि स्टेरॉयड से होने वाला ‘एवास्कुलर नेक्रोसिस’ कुछ महीनों के भीतर विकसित हो सकता है, जिसमें कूल्हे का जोड़ सबसे अधिक प्रभावित होता है।
भाषा जितेंद्र प्रशांत
प्रशांत

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