नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को कहा कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ केवल संरक्षण के बारे में नहीं है, बल्कि यह मानवता द्वारा की गई एक ऐतिहासिक भूल को सुधारने का भी प्रयास है।
मंत्री ‘ब्रिंगिंग द चीता बैक टू इंडिया’ नामक पुस्तक के विमोचन के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस पुस्तक के लेखक राजदूत प्रशांत अग्रवाल हैं, जिन्होंने उन वार्ताओं का नेतृत्व किया था जिनके कारण चीते की देश में वापसी संभव हो पाई।
यादव ने कहा कि पृथ्वी कभी किसी एक प्रजाति के लिए नहीं बनी है और मनुष्य सहअस्तित्व के बिना इस ग्रह पर जीवित नहीं रह सकता।
उन्होंने कहा, ‘हमें किसी भी प्रजाति को विलुप्त होने देने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि प्रत्येक प्रजाति लाखों वर्षों तक चलने वाली विकास प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि एक भी प्रजाति विलुप्त हो जाती है तो यह श्रृंखला टूट जाती है। जीवन के संतुलन को बनाए रखने के लिए हमें प्रकृति-आधारित समाधानों और जीवनशैली का उपयोग करके प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए।’
भाषा
शुभम गोला
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