समृद्ध हिंद-प्रशांत शांतिपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर टिका है: नौसेना प्रमुख |

समृद्ध हिंद-प्रशांत शांतिपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर टिका है: नौसेना प्रमुख

समृद्ध हिंद-प्रशांत शांतिपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर टिका है: नौसेना प्रमुख

: , November 29, 2022 / 07:53 PM IST

नयी दिल्ली, 23 नवंबर (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने बुधवार को कहा कि समृद्ध हिंद-प्रशांत शांतिपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर टिका है और हिंद-प्रशांत समुद्री पहल (आईपीओआई) के जरिए इसे प्राप्त करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों को जोड़ने तथा तालमेल बिठाने की अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने यहां हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) के चौथे संस्करण में अपने संबोधन में यह भी कहा कि समुद्री आतंकवाद और उन्नत प्रौद्योगिकियों के प्रसार ने ‘‘सुरक्षा परिदृश्य को और जटिल कर दिया है।’’ आईपीआरडी भारतीय नौसेना का एक शीर्ष-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन है जो क्षेत्रीय रूप से प्रासंगिक समुद्री मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान और विचार-विमर्श को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि 23-25 नवंबर तक आयोजित होने वाले आईपीआरडी-2022 का विषय ‘‘हिंद-प्रशांत समुद्री पहल का संचालन करना’’ है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार नवंबर 2019 को बैंकॉक में 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) में व्यक्त किया था।

नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि समृद्ध हिंद-प्रशांत शांतिपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर टिका है। आईपीओआई का समुद्री सुरक्षा स्तंभ मित्रों और भागीदारों के बीच सहयोगात्मक जुड़ाव के माध्यम से इस महत्वपूर्ण तत्व का प्रबंधन करना चाहता है।’’

उन्होंने कहा कि इसमें, भारतीय नौसेना को ‘सागर’ की समावेशी दृष्टि से निर्देशित किया गया है और ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ के रूप में यह विस्तारित है। साथ ही, यह सम्मान, संवाद, शांति, समृद्धि और सहयोग के मूल्यों पर आधारित है।

एडमिरल कुमार ने कहा, ‘‘आईपीआरडी के वर्तमान संस्करण ने एक उपयुक्त विषय ‘हिंद-प्रशांत समुद्री पहल का संचालन’ को चुना है, और मुझे विश्वास है कि संवाद में सामूहिक ज्ञान इस परिवर्तनकारी पहल को आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक और परिणाम-उन्मुख विकल्प लाएगा। मेरा मानना है कि ऐसा करते हुए हमें तीन प्रमुख और परस्पर जुड़े क्षेत्रों- सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को संबोधित करने की आवश्यकता है।’’

सुरक्षा परिदृश्य, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा के बारे में उन्होंने कहा कि एक पारंपरिक अंतर-देशीय संघर्ष की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन अधिकार क्षेत्र के विवादों से नियम-आधारित व्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ गया है। यूएनसीएलओएस (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) की भी अवहेलना होने का जोखिम है।

नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘समुद्री आतंकवाद और उन्नत प्रौद्योगिकियों के प्रसार ने सुरक्षा परिदृश्य को और जटिल बना दिया है। वैश्विक मामलों में इसकी बढ़ी हुई केंद्रीयता को देखते हुए, इस क्षेत्र में कई देशों से समुद्री सुरक्षा बलों की उपस्थिति में वृद्धि हुई है।’’

आईपीआरडी नौसेना का एक शीर्ष-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन है और रणनीतिक स्तर पर नौसेना की भागीदारी की प्रमुख अभिव्यक्ति है। नेशनल मेरीटाइम फाउंडेशन (एनएमएफ) नौसेना का ज्ञान भागीदार और आयोजन के प्रत्येक संस्करण का मुख्य आयोजक है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत आज ‘‘रणनीतिक भूगोल का प्रतिनिधित्व करता है जहां हम में से अधिकतर के हित और आकांक्षाएं मिलते हैं। हालांकि, इस रास्ते में कई चुनौतियां हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।’’

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)