कर्नाटक में दक्षिणपंथी सदस्यों ने स्वतंत्रता सेनानियों के पोस्टर पर पुलिस के आदेश की निंदा की |

कर्नाटक में दक्षिणपंथी सदस्यों ने स्वतंत्रता सेनानियों के पोस्टर पर पुलिस के आदेश की निंदा की

कर्नाटक में दक्षिणपंथी सदस्यों ने स्वतंत्रता सेनानियों के पोस्टर पर पुलिस के आदेश की निंदा की

: , September 1, 2022 / 08:40 PM IST

बेलगावी (कर्नाटक), एक सितंबर (भाषा) कुछ दक्षिणपंथी संगठनों और भाजपा नेताओं ने यहां सार्वजनिक स्थानों पर जवाहरलाल नेहरू और वी डी सावरकर समेत स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरों वाले पोस्टर लगाने के पहले अनुमति लेने के पुलिस के आदेश की आलोचना की है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) (कानून व्यवस्था) आलोक कुमार ने कहा कि बेलगावी में स्थानीय निगम निकाय से अनुमति लेने के बाद ही लोग स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें (सार्वजनिक स्थानों पर) लगा सकते हैं।

कुमार ने कहा था, ‘‘ यदि कोई बाल गंगाधर तिलक की तस्वीर लगाना चाहता है तो हमें कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर तस्वीरों– चाहे वह जवाहर लाल नेहरू की हो, या सुभाषचंद्र बोस,भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर की, उसका इस्तेमाल करने से लिए व्यक्ति को स्थानीय निकाय से अनुमति लेनी होगी। ’’

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने बेलगावी में गणेश पंडालों में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर की तस्वीरों वाले पोस्टर लगाने पर कुछ स्थानों पर तनाव पैदा हो जाने के मद्देनजर संभवत: यह आदेश जारी किया था।

इस फैसले की आलोचना करते हुए भाजपा विधायक अभय पाटिल ने कहा कि आलोक कुमार को बेलगावी का इतिहास मालूम नहीं है इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया।

विधायक ने कहा कि पूरे दक्षिण भारत में सबसे पहले बेलगावी में 1905 में बालगंगाधर तिलक ने गणेश की मूर्ति स्थापित की, तब से गणेश पंडालों में तिलक का फोटो लगाने की परंपरा चल पड़ी।

पाटिल ने सवाल किया, ‘‘ क्या अनुमति, कैसी अनुमति? तिलक और सावरकर की तस्वीर लगाने के लिए हमें किसकी अनुमति लेनी होगी? क्या हम अफजल गुरू का फोटो लगा रहे हैं? हम दशकों से उनकी तस्वीरें लगा रहे हैं। जब पहले ऐसी अनुमति की जरूरत नहीं थी तो अब उसकी क्या जरूरत पड़ गयी?’’

उन्होंने कहा कि बेलगावी की परंपरा चलती रहेगी और किसी भी अनुमति की जरूरत नहीं है क्योंकि जिले के लोग ‘कायर’ नहीं हैं।

दक्षिणपंथी संगठन श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने पुलिस के आदेश की निंदा करते हुए कहा, ‘‘श्रीमान् एडीजीपी, हम किस देश में रह रहे हैं? क्या आपको पता नहीं है कि सावरकर और तिलक उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने हमें आजादी दिलायी? क्या हमें सावरकार की तस्वीर लगाने के लिए अनुमति की जरूरत है जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरूद्ध आजीवन संघर्ष किया। ’’

उन्होंने मांग की कि एडीजीपी माफी मांगें और अपना आदेश वापस ले।

इस बीच, दावणगेरे जिले के होन्नाली में कुछ स्थानों पर स्थानीय भाजपा विधायक रेणुकाचार्य के साथ सावरकर और तिलक की तस्वीर वाले पोस्टरों को शरारती तत्वों द्वारा फाड़ दिये जाने के बाद तनाव फैल गया।

दक्षिणपंथी संगठन के सदस्यों ने पोस्टर फाड़ने वालों को गिरफ्तार करने की मांग करते हुए एक थाने के बाहर प्रदर्शन किया।

भाषा

राजकुमार पवनेश

पवनेश

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)