न्यायालय ने ‘‘नेताजी बोस की अस्थियां’’ वापस लाने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
न्यायालय ने ‘‘नेताजी बोस की अस्थियां’’ वापस लाने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रिश्ते के एक पोते द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसमें टोक्यो के रेंकोजी मंदिर से ‘‘बोस की अस्थियों’’ को भारत वापस लाने के निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने जब याचिका पर विचार करने की अनिच्छा व्यक्त की तो याचिकाकर्ता आशीष राय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी।
पीठ ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
सिंघवी ने सुनवाई की शुरुआत में पीठ से कहा, ‘‘मैं परिवार के उन सदस्यों की ओर से पेश हो रहा हूं जो अस्थियों का सम्मानपूर्वक विसर्जन करना चाहते हैं।’’
प्रधान न्यायाधीश ने पूछा कि यह मुद्दा न्यायालय के समक्ष कितनी बार आएगा।
पीठ ने कहा कि पिछले साल ही न्यायालय ने एक याचिका खारिज की थी।
सिंघवी ने कहा कि यह वह मुद्दा नहीं था जो पहले अदालत के समक्ष आया था।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘सबसे पहली बात, अस्थियां कहां हैं? इसका क्या सबूत है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘बोस हमारे राष्ट्र के महानतम नेताओं में से एक थे और हम सभी उनके बलिदान को नमन करते हैं।’’
सिंघवी ने कहा कि यह दर्ज है कि भारत के प्रत्येक राष्ट्राध्यक्ष ने जापान के रेंकोजी मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने पहले जिस मामले पर विचार किया था, वह यह घोषित करने के बारे में था कि बोस की मृत्यु हुई है या नहीं।
पीठ ने कहा, ‘‘सबसे पहले, हम यह जानना चाहेंगे कि परिवार के कितने सदस्य इसका (याचिका का) समर्थन कर रहे हैं।’’
सिंघवी ने कहा कि बोस की एकमात्र उत्तराधिकारी उनकी 84 वर्षीय बेटी हैं और याचिकाकर्ता उनके रिश्ते के पोते हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘वह (बेटी) हमारे सामने उपस्थित नहीं हैं।’’
उसने कहा कि यदि उत्तराधिकारी अस्थियों को देश में लाना चाहती हैं, तो उन्हें अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा।
सिंघवी ने कहा कि बेटी ऑनलाइन माध्यम से अदालत में उपस्थित हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी भावनाओं को कानूनी कार्रवाई में बदला जाए लेकिन उन्हें आगे आना होगा।’’
उसने कहा, ‘‘हमारी जानकारी के अनुसार, घटना को लेकर परिवार के भीतर ही मतभेद हैं।’’
भाषा सिम्मी नरेश
नरेश

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