श्रद्धा वालकर मामला: वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये विदेशी गवाहों का परीक्षण करने संबंधी याचिका खारिज

श्रद्धा वालकर मामला: वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये विदेशी गवाहों का परीक्षण करने संबंधी याचिका खारिज

श्रद्धा वालकर मामला: वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये विदेशी गवाहों का परीक्षण करने संबंधी याचिका खारिज
Modified Date: June 9, 2026 / 07:50 pm IST
Published Date: June 9, 2026 7:50 pm IST

नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने सनसनीखेज श्रद्धा वालकर हत्याकांड में अभियोजन पक्ष द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विदेशी गवाहों का परीक्षण करने की अनुमति देने का अनुरोध करने वाली तीन अर्जियां खारिज कर दी हैं।

हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने अभियोजन पक्ष को नए अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंस नियम, 2025 के तहत नए आवेदन दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी है।

अदालत ने एक जून के एक आदेश में कहा कि कानून में बदलाव के कारण और नए व्यापक नियमों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंस नियम, 2025 के लागू होने के मद्देनजर तीनों अर्जी खारिज की जाती हैं।

वालकर (27) एक कॉल सेंटर में कर्मचारी थी, जिसकी कथित तौर पर उसके साथी आफताब पूनावाला ने 2022 में हत्या कर दी थी। आफताब पर श्रद्धा का गला घोंटने के बाद उसके शव के कई टुकड़े करने और उन्हें फ्रिज में रखने का आरोप है। इसके बाद उसने कई दिनों तक दिल्ली में उसके शव के टुकड़ों का निपटान किया।

आरोपी ने मेहरौली इलाके में एक किराए के फ्लैट में इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपी को 12 नवंबर, 2022 को गिरफ्तार कर लिया गया था।

दिसंबर 2024 और जुलाई 2025 के बीच जांच अधिकारी द्वारा दायर आवेदनों में गूगल, बम्बल, हॉपर और व्हाट्सएप/मेटा सहित बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नोडल अधिकारियों के बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी गई थी, जो अमेरिका और ब्रिटेन में स्थित हैं।

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि विदेशी गवाहों को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से बुलाने से मुकदमे के निष्कर्ष तक पहुंचने में काफी देरी होगी और प्रौद्योगिकी का उपयोग कार्यवाही को गति देने में सहायक हो सकता है।

हालांकि, बचाव पक्ष के वकील अक्षय भंडारी ने आवेदनों का विरोध करते हुए तर्क दिया कि दिल्ली उच्च न्यायालय वीडियो कॉन्फ्रेंस नियम, 2021 के तहत आपराधिक मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विदेशी गवाहों की गवाही दर्ज करने से पहले आरोपी की सहमति अनिवार्य है।

अदालत ने कहा कि आवेदनों के लंबित रहने के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 जुलाई तय की है।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप


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