हस्ताक्षर जालसाजी: अदालत ने अभिषेक को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत 17 जुलाई तक बढ़ाई

हस्ताक्षर जालसाजी: अदालत ने अभिषेक को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत 17 जुलाई तक बढ़ाई

हस्ताक्षर जालसाजी: अदालत ने अभिषेक को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत 17 जुलाई तक बढ़ाई
Modified Date: July 3, 2026 / 07:45 pm IST
Published Date: July 3, 2026 7:45 pm IST

कोलकाता, तीन जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर तृणमूल कांग्रेस की पसंद से संबंधित प्रस्ताव पर हस्ताक्षर जालसाजी के मामले में पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण शुक्रवार को 17 जुलाई तक बढ़ा दिया।

न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने अंतरिम संरक्षण की अवधि बढ़ाई, क्योंकि जिस न्यायाधीश की अदालत में इस मामले की सुनवाई होनी है, वह फिलहाल जलपाईगुड़ी सर्किट पीठ में कार्यरत हैं।

अभिषेक बनर्जी के वकील द्वारा मामले का उल्लेख किए जाने पर न्यायमूर्ति घोष ने अंतरिम संरक्षण बढ़ा दिया। इससे पहले न्यायमूर्ति कौशिक चंदा द्वारा दिया गया अंतरिम संरक्षण शुक्रवार को समाप्त हो रहा था।

न्यायमूर्ति घोष ने निर्देश दिया कि मामले को 13 जुलाई को नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समन्वय पीठ द्वारा अंतरिम संरक्षण प्रदान करते समय लगाई गई सभी शर्तें अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी।

न्यायमूर्ति चंदा के निर्देश पर अभिषेक बनर्जी 11 जून को इस मामले में पूछताछ के लिए यहां सीआईडी मुख्यालय ‘भवानी भवन’ में जांच एजेंसी के समक्ष पेश हुए थे।

न्यायमूर्ति चंदा ने अभिषेक बनर्जी को तीन सप्ताह के लिए किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान करते हुए निर्देश दिया था कि वह जांच एजेंसी की ओर से 24 घंटे पहले सूचना दिए जाने पर आवश्यकता पड़ने पर उसके समक्ष पेश होंगे।

सीआईडी पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय में तृणमूल कांग्रेस के दो बागी विधायकों द्वारा दायर शिकायत की जांच कर रही है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विपक्ष के नेता के रूप में बालीगंज के विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय की नियुक्ति संबंधी पार्टी के प्रस्ताव पर उनके जाली हस्ताक्षर किए गए।

दोनों विधायकों- ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा – की शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने कोलकाता पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बाद में राज्य के गृह सचिव ने जांच सीआईडी को सौंप दी थी।

सरकार के वकील के अनुसार, डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को इससे पहले सीआईडी ने तीन बार तलब किया था लेकिन वह अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए जांच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए थे।

भाषा अमित नरेश

नरेश


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