दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तरी बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचा

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दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तरी बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचा

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  • Publish Date - June 9, 2026 / 07:53 PM IST,
    Updated On - June 9, 2026 / 07:53 PM IST

कोलकाता/शिलांग, नौ जून (भाषा) दक्षिण-पश्चिम मानसून मंगलवार को उत्तरी बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच गया। केरल में चार जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून के दस्तक के साथ ही देश में चार महीने के वर्षा ऋतु की शुरुआत का संकेत मिल गया था।

उत्तरी बंगाल आठ पूर्वोत्तर राज्यों का प्रवेश द्वार है। मौसम विभाग ने कहा कि अगले चार से पांच दिनों में मानसून के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

मंगलवार को जारी एक बुलेटिन में, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा, ‘‘दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वोत्तर राज्यों के शेष हिस्सों, पूरे सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है।’’

आईएमडी ने उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार जिलों में 13 जून तक भारी बारिश का पूर्वानुमान लगाया है।

इसने 15 जून तक के अपने पूर्वानुमान में दक्षिण बंगाल के कुछ जिलों में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है, जहां उमस भरा और असुविधाजनक मौसम बना हुआ है।

मौसम विज्ञानियों ने कहा कि क्षेत्र में चक्रवाती परिसंचरण और तेज दक्षिण-पश्चिमी हवाओं सहित अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण मानसून के आगे बढ़ने में मदद मिली है।

आईएमडी को उम्मीद है कि इस वर्ष भारत में वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के लगभग 90% के बराबर होगी।

एलपीए किसी विशिष्ट क्षेत्र में एक निश्चित अवधि (जैसे एक महीना या एक ऋतु) में दर्ज की गई वर्षा को संदर्भित करता है, जिसका औसत आमतौर पर 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि के आधार पर निकाला जाता है।

वर्ष 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में मौसमी वर्षा का दीर्घकालिक औसत (एलपीए) 87 सेमी है। यदि मानसून के मौसम में एलपीए के 90 प्रतिशत से कम वर्षा होती है, तो आईएमडी इसे ‘कम वर्षा’ के रूप में वर्गीकृत करता है।

सामान्य से कम वर्षा का एक कारण अल नीनो की स्थिति का उभरना हो सकता है, जिसके कारण देश में मानसून के दौरान कम बारिश होती है।

आईएमडी ने कहा कि अल नीनो की स्थिति के जून में कमजोर रहने के आसार हैं जबकि सितंबर से इसका मध्यम से मजबूत प्रभाव दिखेगा।

भाषा संतोष नरेश

नरेश

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