अध्यक्ष ने विधानसभा की 200 से ज्यादा तदर्थ नियुक्तियां रद्द की, सचिव भी निलंबित |

अध्यक्ष ने विधानसभा की 200 से ज्यादा तदर्थ नियुक्तियां रद्द की, सचिव भी निलंबित

अध्यक्ष ने विधानसभा की 200 से ज्यादा तदर्थ नियुक्तियां रद्द की, सचिव भी निलंबित

: , September 23, 2022 / 05:26 PM IST

देहरादून, 23 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने शुक्रवार को कड़ी कार्रवाई करते हुए विधानसभा में नियम विरूद्ध की गयीं 200 से ज्यादा तदर्थ नियुक्तियों को रद्द कर दिया । विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को भी उन्होंने उनकी संदिग्ध भूमिका के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया ।

खंडूरी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रद्द की गयीं कुल 228 तदर्थ नियुक्तियों में वर्ष 2016 की 150 भर्तियां, 2020 की छह और 2021 की 72 नियुक्तियां शामिल हैं ।

निरस्त तदर्थ नियुक्तियां कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों के कार्यकाल के दौरान की गयी थीं। वर्ष 2016 में कांग्रेस सरकार के समय गोविंद सिंह कुंजवाल विधानसभा अध्यक्ष थे जबकि उसके बाद भाजपा सरकार के समय प्रेम चंद्र अग्रवाल ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी। अग्रवाल, वर्तमान पुष्कर सिंह धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं ।

खंडूरी ने बताया कि नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला हाल में विधानसभा में भर्तियों पर भाई भतीजावाद के लगे आरोपों के बीच गठित तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है ।

डीके कोटिया समिति ने अध्यक्ष को जांच रिपोर्ट बृहस्पतिवार देर रात सौंपी थी । इस संबंध में अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने 20 दिन पहले विशेषज्ञ समिति गठित की थी, जिसने उन्हें निर्धारित एक माह से पहले ही जांच रिपोर्ट सौंप कर सराहनीय कार्य किया है।

कुल 214 पृष्ठों की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए खंडूरी ने कहा कि समिति ने विधान सभा सचिवालय के रिकार्ड का परीक्षण करने पर 2016, 2020 तथा 2021 में की गयीं तदर्थ नियुक्तियों में अनियमितताए पाई हैं और विभिन्न पदों के लिए हुई इन भर्तियों में निर्धारित नियमों का पालन न होने के चलते उन्हें निरस्त करने की सिफारिश की है ।

उन्होंने कहा कि समिति ने तदर्थ नियुक्तियों को निरस्त करने के लिए जो कारण गिनाए हैं, उनमें नियुक्तियों को चयन समिति के माध्यम से न करना, भर्ती के लिए कोई विज्ञापन, सार्वजनिक सूचना या रोजगार कार्यालय से नाम न मंगाना, कोई प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन न करना और केवल व्यक्तिगत आवेदन पत्रों पर नियुक्ति देना शामिल हैं ।

खंडूरी ने कहा कि जांच समिति ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि नियुक्तियों में 2003 के उस शासनादेश का भी पालन नहीं किया गया जिसमें सरकार ने श्रेणी ‘ग’ और ‘घ’ के पदों पर तदर्थ या संविदा नियुक्तियों पर रोक लगाई गयी है।

उन्होंने कहा, ‘नियुक्तियों को निरस्त करने के अपने निर्णय के अनुमोदन के लिये मैं तत्काल राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज रही हूँ । अनुमोदन प्राप्त होते ही नियम विरूद्ध तदर्थ नियुक्तियां तत्काल समाप्त कर दी जाएंगी।’

इसके अलावा, विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले साल विधान सभा सचिवालय द्वारा 32 पदों पर सीधी भर्ती के लिये हुई लिखित परीक्षा को भी रदद कर दिया गया है ।

खंडूरी ने कहा कि इस परीक्षा को आयोजित कराने वाली लखनऊ की विवादास्पद कंपनी आएएमएस टैक्नोसोल्यूशनस का चयन करने में भी विधानसभा सचिवालय में नियमों का उल्लंघन किया गया और उसका बिल प्राप्त होने के दो दिन के अंदर 59 लाख रू का भुगतान भी जारी कर दिया गया ।

उन्होंने कहा कि उन्होंने इसमें विधान सभा सचिव मुकेश सिंघल की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उसकी जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया है ।

भाषा दीप्ति दीप्ति रंजन

रंजन

 

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