शीर्ष अदालत ने घरेलू सहायकों के कल्याणकारी उपायों के लिए निर्देश जारी करने से इनकार किया

शीर्ष अदालत ने घरेलू सहायकों के कल्याणकारी उपायों के लिए निर्देश जारी करने से इनकार किया

शीर्ष अदालत ने घरेलू सहायकों के कल्याणकारी उपायों के लिए निर्देश जारी करने से इनकार किया
Modified Date: January 29, 2026 / 03:44 pm IST
Published Date: January 29, 2026 3:44 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने घरेलू सहायकों के लिए न्यूनतम मजदूरी के व्यापक कानूनी ढांचे और इसे लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से यह कहते हुए बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया कि वह केंद्र और राज्यों को मौजूदा कानूनों में संशोधन पर विचार करने के लिए कहने वाला कोई आदेश जारी नहीं कर सकता।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि देश में औद्योगिक विकास को रोकने के लिए ट्रेड यूनियनवाद काफी हद तक जिम्मेदार रहा है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “ देश में ट्रेड यूनियनों की वजह से कितनी औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं? ज़रा हकीकत बताइए।। देश के सभी पारंपरिक उद्योग, इन ‘झंडा’ यूनियनों की वजह से, पूरे देश में बंद हो गए हैं। वे काम नहीं करना चाहते। देश में औद्योगिक विकास को रोकने के लिए ये ट्रेड यूनियन नेता काफी हद तक जिम्मेदार हैं।”

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “निस्संदेह शोषण होता है, लेकिन शोषण से निपटने के उपाय भी हैं। लोगों को उनके व्यक्तिगत अधिकारों के बारे में अधिक जागरूक किया जाना चाहिए था, लोगों को अधिक कुशल बनाया जाना चाहिए था, और भी कई सुधार किए जाने चाहिए थे।”

देश भर में लाखों घरेलू सहायकों की ‘दुर्दशा’ की बात को मानते हुए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि न्यायपालिका कानूनों को लागू करने के लिए विधायिका के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं कर सकती।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “जब तक विधायिका से उपयुक्त कानून बनाने का अनुरोध नहीं किया जाता, तब तक कोई भी लागू करने योग्य आदेश पारित नहीं किया जा सकता। इस अदालत द्वारा ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया जाना चाहिए।”

हालांकि, अदालत ने घरेलू सहायकों के संघ ‘पेन थोजिलालार्गल संगम’ समेत अन्य याचिकाकर्ताओं से राज्यों और केंद्र सरकार के समक्ष घरेलू सहायकों की दुर्दशा को उजागर करने का आग्रह किया ताकि इस मामले में उचित निर्णय लिया जा सके।

अदालत ने कहा कि पत्राचार से पता चलता है कि राज्यों द्वारा इस पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है और “हमें उम्मीद है कि उनकी सहायता और शोषण को रोकने के लिए एक उपयुक्त तंत्र तैनात किया जाएगा।

पीठ ने इसके साथ जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।

भाषा नोमान नरेश

नरेश


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