तमिलनाडु चुनाव : द्रमुक, अन्नाद्रमुक और टीवीके के लिए ताकत, अवसर और चुनौतियां
तमिलनाडु चुनाव : द्रमुक, अन्नाद्रमुक और टीवीके के लिए ताकत, अवसर और चुनौतियां
चेन्नई, 15 मार्च (भाषा) तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक, मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक और नवगठित पार्टी टीवीके के लिए नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में ताकत, कमजोरी, अवसर और चुनौतियां (एसडब्ल्यूओटी) निम्न हैं :
द्रमुक की ताकत : द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन (73) द्रविड़ शैली के शासन का दावा करके भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सुशासन के विपरीत राजनीतिक बढ़त बनाए रख सकते हैं। स्टालिन ने खुद को सामाजिक न्याय के समर्थक के रूप में स्थापित किया है। द्रमुक की कल्याणकारी पहलें, विशेष रूप से महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और परिवार की महिला मुखियाओं के लिए मासिक भत्ता, काफी लोकप्रिय हैं। सहयोगी दल कांग्रेस, एमडीएमके, वीसीके और वामपंथी दल सत्ताधारी द्रमुक का लगातार समर्थन कर रहे हैं।
कमजोरी : द्रमुक को वंशवादी शासन को बढ़ावा देने के लिए विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। स्टालिन के पुत्र एवं उपमुख्यमंत्री उदयनिधि की विवादास्पद टिप्पणियों के चलते पार्टी को अक्सर भाजपा और अन्नाद्रमुक के हमलों का सामना करना पड़ता है।
अवसर : तमिलनाडु के औद्योगीकरण के लिए निवेश आकर्षित करने पर द्रमुक का ध्यान और युवाओं के लिए रोजगार के वादे से युवा मतदाताओं को लुभाने की क्षमता है। पार्टी को तमिल पहचान के लिए समर्थन की उम्मीद रहती है।
चुनौतियां : अभिनेता एवं टीवीके प्रमुख विजय का चुनावी राजनीति में प्रवेश द्रमुक के लिए एक चुनौती पेश करता है। द्रमुक के अधूरे वादे – नीट को खत्म करना, पेट्रोल सब्सिडी – विवाद का मुख्य कारण बने हुए हैं।
अन्नाद्रमुक की ताकत : पलानीस्वामी पार्टी के निर्विवाद नेता के रूप में उभरे हैं, जबकि शीर्ष पद के दूसरे दावेदार, निष्कासित नेता ओ पन्नीरसेल्वम अब द्रमुक में शामिल हो गए हैं। दिग्गज नेता एमजी रामचंद्रन (जिन्हें प्यार से एमजीआर कहा जाता था) द्वारा स्थापित अन्नाद्रमुक को मछुआरे और अल्पसंख्यकों सहित सभी वर्गों में अपना समर्थन प्राप्त है। पार्टी की संगठनात्मक संरचना मजबूत है और इसके कार्यकर्ता बूथ स्तर पर भी सक्रिय हैं।
कमजोरी : पन्नीरसेल्वम का द्रमुक गठबंधन में शामिल होना अन्नाद्रमुक के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी प्रेमलता विजयकांत के नेतृत्व वाली डीएमडीके को अपने साथ बनाए रखने में विफल रही, जो द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई है।
अवसर : भाजपा, वन्नियार समुदाय के व्यापक समर्थन वाली पीएमके और एएमएमके के साथ पार्टी का गठबंधन, द्रमुक के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर में उसे अधिक प्रभावी ताकत बनाता है। पलानीस्वामी का लगातार द्रमुक को राज्य से जुड़े मुद्दों पर घेरना अन्नाद्रमुक को चुनावी फायदा दे सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चलाया जा रहा जोरदार प्रचार अभियान, जिसमें अन्नाद्रमुक के दिग्गज नेता एमजीआर और जयललिता की विरासत का आह्वान किया गया है और द्रमुक के परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाई गई है।
चुनौतियां : अभिनेता से नेता बने विजय की पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं और युवा मतदाताओं को आकर्षित करने की क्षमता अन्नाद्रमुक के लिए कुछ हद तक प्रतिकूल भी साबित हो सकती है।
टीवीके की ताकत : फिल्म अभिनेता के तौर पर बड़ी संख्या में विजय के प्रशंसकों की संख्या उनकी पार्टी को लाभ दे सकती है। युवा मतदाता टीवीके के पक्ष में पलड़ा झुकाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कमजोरी : विजय राजनीति में बिल्कुल नये हैं और उन्हें इस बात की आलोचना का सामना करना पड़ता है कि वह फिल्मों में संवाद बोलने की तरह ही राजनीतिक भाषण देते हैं। फिलहाल वह अपनी पार्टी के इकलौते स्टार प्रचारक हैं।
अवसर : यह पार्टी युवा मतदाताओं और तकनीकी रूप से जागरूक समुदाय को लक्षित कर रही है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक जैसे पारंपरिक द्रविड़ दलों से ऊब चुके मतदाता टीवीके को पसंद कर सकते हैं।
चुनौतियां : करूर भगदड़ मामला टीवीके के लिए एक महत्वपूर्ण झटका है, जिससे उसकी चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। पार्टी को अन्नाद्रमुक और द्रमुक जैसी स्थापित पार्टियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिनका संगठन मजबूत है।
भाषा
शफीक दिलीप
दिलीप

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