मुफ्त सौगात से निपटने के लिए चुनावी भाषणों को निशाना बनाना निरर्थक प्रयास : आप ने न्यायालय में कहा |

मुफ्त सौगात से निपटने के लिए चुनावी भाषणों को निशाना बनाना निरर्थक प्रयास : आप ने न्यायालय में कहा

मुफ्त सौगात से निपटने के लिए चुनावी भाषणों को निशाना बनाना निरर्थक प्रयास : आप ने न्यायालय में कहा

: , August 16, 2022 / 09:19 PM IST

नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि यदि राजनीतिक दलों द्वारा चुनावों के दौरान मुफ्त सौगात देने के वादों के कारण राजकोषीय घाटे को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं तो चुनावी भाषणों को निशाना बनाना तथा उन्हें विनियमित करना ‘एक निरर्थक प्रयास’ होगा।

सर्वोच्च अदालत चुनावों के दौरान मुफ्त सौगातों की घोषणा के मुद्दे पर विचार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने पर विचार कर रही है। आप ने न्यायालय में कहा कि विधायी मदद के बिना चुनावी भाषणों पर रोक भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।

आप ने अपनी अतिरिक्त दलीलों में कहा, ‘इस तरह का प्रतिबंध या निषेध, कार्यपालिका या न्यायपालिका के जरिए, संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित करेगा…।’’

पार्टी ने कहा, ‘‘ इसके अलावा, अगर राजकोषीय घाटे और जिम्मेदारी को लेकर चिंता वास्तव में मौजूदा कार्यवाही (जनहित याचिका) का मुद्दा है, तो चुनावी भाषण को निशाना बनाना और विनियमित करना निरर्थक प्रयास से ज्यादा कुछ नहीं होगा।’

पार्टी ने कहा कि चुनावी भाषण को निशाना बना कर राजकोषीय घाटे के मुद्दों को हल करने की कोशिश राजनीतिक दलों को कल्याण के संबंध में अपने वैचारिक रुख को व्यक्त करने से रोककर चुनावों की लोकतांत्रिक गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाएगी। इसके साथ ही राजकोषीय जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कोई प्रगति नहीं होगी।

प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने अतार्किक मुफ्त सौगातों के संबंध में विचार करने के लिए समिति गठित किए जाने के मुद्दे पर सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं।

इस जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई होने वाली है। न्यायालय वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

भाषा अविनाश पवनेश

पवनेश

 

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