केंद्र ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर सौंपने का निर्देश दिया

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केंद्र ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर सौंपने का निर्देश दिया

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  • Publish Date - May 24, 2026 / 12:44 AM IST,
    Updated On - May 24, 2026 / 12:44 AM IST

नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर सौंपने को कहा है। सरकार ने कहा है कि 27.3 एकड़ का यह भूखंड ‘‘रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित’’ करने के लिए आवश्यक है।

इस कदम से लगभग एक सदी तक दिल्ली के प्रभावशाली और अभिजात वर्ग के मेल-जोल का केंद्र रहे इस क्लब के बंद होने का खतरा मंडराने लगा।

दिल्ली के लुटियंस रोड के बीचोंबीच 2, सफदरजंग रोड पर स्थित यह विशाल परिसर, इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड (अब दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) को सामाजिक और खेल क्लब के संचालन के लिए पट्टे पर दिया गया था।

लुटियंस दिल्ली के मध्य में स्थित विशाल दिल्ली जिमखाना क्लब लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के पास है।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित यह परिसर रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अन्य अहम उद्देश्यों के लिए बेहद जरूरी है।

इस घटनाक्रम के बाद शनिवार शाम, जिमखाना क्लब ने कहा कि वह परिसर सौंपने के आदेश से संबंधित कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए ‘एल एंड डी ओ’ को पत्र लिखेगा।

क्लब ने अपने सदस्यों को भेजे गए एक आधिकारिक संदेश में कहा, ‘‘अचानक हुए घटनाक्रम के मद्देनजर, जिमखाना क्लब ने आज आपातकालीन आधार पर बैठक की और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद क्लब के सदस्यों तथा कर्मचारियों के हित में कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए ‘एल एंड डी ओ’ को तत्काल जवाब दाखिल करने का निर्णय लिया।’’

इसने यह भी कहा कि उसने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों से तत्काल मुलाकात का समय मांगा है।

क्लब ने यह भी कहा कि उसकी तत्काल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि क्लब का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रहे, और सरकार से एक बार जवाब मिल जाने पर आगे के घटनाक्रम के बारे में जानकारी साझा की जाएगी।

सरकार के इस कदम की विभिन्न वर्गों ने आलोचना की है।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सौरभ भारद्वाज ने शनिवार को आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ‘‘लोगों को एक-एक करके विस्थापित कर रही है’’, और ‘‘आखिरकार सबकी बारी आएगी’’।

भारद्वाज ने कहा, ‘‘जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, इसने केवल लोगों को विस्थापित किया है, किसी का पुनर्वास नहीं किया है। अब तक गरीब ही प्रभावित हो रहे थे, इसलिए अमीरों को ज्यादा चिंता नहीं थी।’’

उन्होंने कहा कि पहले दुकानदारों की बारी आई, इसलिए वेतनभोगी पेशेवरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा, और अब वरिष्ठ अधिकारियों और क्लबों में आने वाले पेशेवरों की बारी आ गई है।

भारद्वाज ने कहा, ‘‘आखिरकार सबकी बारी आएगी।’’

वहीं, चेन्नई में, मद्रास जिमखाना क्लब के अध्यक्ष कैप्टन एस. शेषाद्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ‘‘रक्षा अवसंरचना को मजबूत और सुरक्षित करने’’ के लिए दिल्ली जिमखाना क्लब को अपने कब्जे में लिए जाने का कदम बहुत दुखद घटना है।

दिल्ली जिमखाना क्लब के कई सदस्यों ने कहा कि यह आदेश उनके लिए ‘‘झटका’’ है और वे इसे अदालत में चुनौती देंगे।

इस संबंध में एक सदस्य ने कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति पिछले कुछ वर्षों से क्लब का संचालन कर रही है और मौजूदा प्रबंधन द्वारा बेदखली के आदेश को अदालत में चुनौती देने की उम्मीद नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम मौजूदा क्लब प्रबंधन से इस आदेश को चुनौती देने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं, जबकि इसका संचालन फिलहाल सरकार द्वारा नियुक्त समिति द्वारा किया जा रहा है? सदस्यों को सरकार के आदेश को चुनौती देने के लिए स्वयं आवेदन दाखिल करना होगा।’’

एल एंड डीओ ने 22 मई यानी शुक्रवार को क्लब के सचिव को लिखे पत्र में कहा कि इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड (जिसे अब दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) को 2, सफदरजंग रोड स्थित यह परिसर सामाजिक और खेल क्लब संचालित करने के विशिष्ट उद्देश्य से पट्टे पर दिया गया था।

इसने कहा कि आसपास की सरकारी जमीनों को वापस लेने की व्यापक प्रक्रिया के तहत यह भूमि तात्कालिक संस्थागत जरूरतों, शासन-प्रशासन संबंधी बुनियादी ढांचे और जनहित की परियोजनाओं के लिए आवश्यक है।

आदेश में कहा गया, ‘‘भारत की राष्ट्रपति, पट्टा विलेख के खंड चार के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से उक्त परिसर का पट्टा तत्काल प्रभाव से समाप्त करती हैं और उस पर पुन: कब्जा लेने का आदेश देती हैं।’’

इसमें कहा गया, ‘‘इस प्रकार पुनः कब्जा लेने पर 27.3 एकड़ भूमि का संपूर्ण भूखंड, जिसमें उस पर स्थित सभी भवन, स्थायी संरचनाएं, ढांचे, लॉन और साजो-सामान शामिल हैं, भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से पट्टादाता अर्थात् राष्ट्रपति के पास चला जाएगा।’’

आदेश के अनुसार, भूमि एवं विकास कार्यालय परिसर को पांच जून को अपने कब्जे में लेगा।

इसमें कहा गया, ‘‘आपको निर्देश दिया जाता है कि आप निर्धारित तिथि को परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा इस कार्यालय के प्रतिनिधियों को सौंप दें। अनुपालन न करने की स्थिति में कानून के अनुसार कब्जा ले लिया जाएगा।’’

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लुटियंस दिल्ली में विभिन्न संस्थानों को पट्टे पर आवंटित अधिकांश भूमि भारत सरकार के स्वामित्व में है, जो सुरक्षा और राष्ट्रहित में अन्य कारणों का हवाला देते हुए अपनी भूमि वापस लेने के लिए अपने ‘‘अधिकार’’ का इस्तेमाल कर सकती है।

दिल्ली जिमखाना क्लब शहर की सबसे मूल्यवान और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जमीनों में से एक पर स्थित है। यह उच्च सुरक्षा वाले प्रशासनिक क्षेत्र में है, जहां केंद्र सरकार और रक्षा से जुड़े कई प्रमुख प्रतिष्ठान हैं।

ब्रिटिश काल में स्थापित इस क्लब ने 1913 में इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब के नाम से इस स्थल से संचालन शुरू किया था। भारत की आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया और मौजूदा संरचनाओं का निर्माण 1930 के दशक में किया गया था।

केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिए जाने के बाद क्लब के लगभग 600 कर्मचारियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे। नौकरी की सुरक्षा और आगे की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता के अभाव में कर्मचारी चिंतित हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें प्रबंधन से भविष्य की कार्यवाही के बारे में कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है।

इस संबंध में एक कर्मचारी ने कहा कि कर्मचारियों को इस घटनाक्रम की जानकारी हाल ही में मिली और अचानक जारी हुए इस आदेश ने उन्हें चिंतित कर दिया।

कर्मचारी ने कहा, ‘‘अब तक कर्मचारियों के साथ कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है। हममें से अधिकांश अभी भी इस बात पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं कि पांच जून के बाद हमारी नौकरियों का क्या होगा।’’

प्रभावित लोगों में लंबे समय से कार्यरत वे कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्होंने दशकों तक क्लब की सुविधाओं का रखरखाव किया है।

वहीं, पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने इस कदम को दुखद करार देते हुए कहा कि यह संस्थान शहर की ‘‘संस्थागत और खेल विरासत’’ का हिस्सा है।

भाषा नेत्रपाल

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